शाहजहांपुर। जिले में डिप्थीरिया (गलघोंटू) को लेकर चिंता बढ़ी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में पांच मरीजों में डिप्थीरिया की पुष्टि होने के बाद उन्हें भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। इनमें तीन मरीज दूसरे जिलों के और दो शाहजहांपुर के हैं। चिकित्सकों के अनुसार उपचार के बाद सभी मरीजों की हालत में पहले की अपेक्षा सुधार है।
लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी क्षेत्र के एक गांव निवासी करीब साढ़े चार वर्षीय बालिका को रविवार को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। उसके पिता के अनुसार कई दिनों से बुखार आ रहा था। दवा खाने पर बुखार उतर जाता, लेकिन असर खत्म होने के बाद फिर चढ़ जाता था। गले में टॉन्सिल की समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह के बाद उसे मेडिकल कॉलेज लाया गया। उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार बताया गया है।
लखीमपुर खीरी के उचौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 20 वर्षीय युवती को भी 18 सितंबर को भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार बुखार के बाद उसके गले में परेशानी शुरू हुई थी। हरदोई जिले के पिहानी थाना क्षेत्र के करीब तीन वर्षीय बच्चे को भी छह दिन पहले भर्ती कराया गया। उसके गले में संक्रमण की समस्या थी।
वहीं, 18 सितंबर को निगोही क्षेत्र के एक गांव निवासी 11 वर्षीय बालिका को गले में परेशानी होने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। तिलहर क्षेत्र के एक गांव निवासी करीब साढ़े चार वर्षीय बालक को 15 सितंबर को भर्ती कराया गया था। उसे आठ दिन से लगातार बुखार के साथ गले में परेशानी हो रही थी।
टीकाकरण से डिप्थीरिया से बचाव संभव
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि डिप्थीरिया बैक्टीरिया से होने वाली संक्रामक बीमारी है। इसमें नाक और गले में संक्रमण का खतरा रहता है। टीकाकरण के जरिये इससे बचाव किया जा सकता है। बुखार, जुकाम, सिरदर्द, नाक बहना और गले की ग्रंथियों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार कराना चाहिए। भर्ती मरीजों की हालत में सुधार है।
संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी जरूरी
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि डिप्थीरिया संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिये फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के मुंह, नाक और गले में इसके जीवाणु मौजूद हो सकते हैं। इसलिए मरीज के संपर्क में आने से बचना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोना चाहिए। खांसने या छींकने के बाद हाथ जरूर साफ करें। हाथ गंदे न दिखने पर भी अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।