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डीआईओएस ने पकड़े बिना मान्यता के तीन स्कूल

Wed, 27 Jul 2016 12:08 AM IST
ब्यूरो /शाहजहांपुर
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डीआईओएस डॉ. केएल वर्मा ने मंगलवार को विकास खंड ददरौल का भ्रमण कर स्कूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें बिना मान्यता वाले तीन ऐसे विद्यालय मिले, जो बिना किसी मान्यता के संचालित किए जा रहे थे। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं संख्या नगण्य थी। साधारण से एक-दो कमरों में चल रहे अमान्य विद्यालयों में फर्नीचर भी नहीं था। एक स्कूल में उनके पहुंचते ही शिक्षक उपस्थिति पंजिकाएं लेकर स्कूल के पीछे वाली दीवार कूद कर भाग गए। डीआईओएस ने कहा कि इन स्कूलों तथा इनके जैसे अन्य बिना मान्यता वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 
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डीआईओएस डॉ. वर्मा ने बताया कि वह सुबह ददरौल विकास खंड में संचालित स्कूलों के निरीक्षण को पहुंचे तो उन्हें पिंगरा-पिंगरी गांव में एक छोटे से भवन में दुर्विजय पब्लिक स्कूल संचालित मिला। यह स्कूल बिना किसी मान्यता के 12वीं तक संचालित किया जा रहा था, जबकि मान्यता किसी भी वर्ग की नहीं थी। जो स्टाफ मौजूद था, उसने कोई भी अभिलेख नहीं दिखाया, फर्नीचर भी नहीं था। यहां कक्षा छह में सात, सात में 12 बच्चे थे, कक्षा आठ में एक भी बच्चा नहीं था, कक्षा नौ में नौ, दस में 16, 11 में एक और कक्षा 12 में दो बच्चे मिले। 
इसी तरह धन्यौरा में कृष्णा पब्लिक स्कूल भी 12वीं तक बिना मान्यता के संचालित किया जा रहा था। इस स्कूल में चार शिक्षक मौजूद थे। यही हाल दनियापुर के समीप चौढ़ेरा गांव में देखने को मिला। चौढ़ेरा में पत्तूलाल पब्लिक स्कूल पांचवीं तक मान्यता प्राप्त है, लेकिन 10वीं तक की पढ़ाई यहां कराई जा रही थी। उन्हें स्कूल में प्रवेश करते देखते ही, शिक्षक स्कूल के पीछे दीवार कूद कर रजिस्टर लेकर भाग गए। 
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इस स्कूल में कक्षा एक में आठ, दो में आठ, तीन में चार, चार में नौ, पांच में सात, छह में छह, सात में चार, आठ में तीन, नौ में चार और कक्षा दस में 12 बच्चे मिले। इसके बाद डीआईओएस ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल धन्योरा का भी निरीक्षण किया। उच्च प्राथमिक स्कूल में तो सब कुछ ठीक-ठाक था, लेकिन प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका रिचा सिंह प्रसूति अवकाश पर बताई गईं, लेकिन उनका स्वीकृत प्रार्थना पत्र स्कूल में नहीं मिला। जबकि सोनिया सक्सेना का प्रसूति अवकाश 19 जुलाई से स्वीकृत हुआ मिला, लेकिन उपस्थिति पंजिका उनके 20 जुलाई को भी हस्ताक्षर थे। प्रार्थना पत्र पर अवकाश की प्रकृति स्पष्ट नहीं थी। 
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जलालाबाद में बिना मान्यता वाले स्कूलों की भरमार
शाहजहांपुर। अमान्य विद्यालयों (बिना मान्यता) की लंबी फेहरिस्त देखनी हो तो तहसील जलालाबाद को खंगालना होगा। यहां डीआईओएस को बहुत अधिक मेहनत भी शायद नहीं करनी होगी। खुलेआम दर्जनों स्कूल शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का शोषण और उत्पीड़न करते मिल जाएंगे। इन स्कूलों में शायद ही किसी के पास प्राथमिक स्तर की मान्यता हो, लेकिन कक्षाएं 12वीं तक की चल रही हैं। ऐसे ही स्कूलों की शिकायत क्षेत्र के मोहित कुमार ने डीआईओएस से की है और बताया है कि जलालाबाद क्षेत्र में बिना मान्यता के करीब दो दर्जन स्कूल धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें चार से एक हजार रुपये तक शुल्क भी वसूला जा रहा है। साथ ही अभिभावकों को धोखे में रखकर उन्हें गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने डीआईओएस से बिना मान्यता वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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राजकीय शिक्षकों की बैठक 29 को
शाहजहांपुर। डीआईओएस डॉ. केएल वर्मा ने राजकीय कॉलेजों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए समस्त प्रधानाचायों और शिक्षक-शिक्षिकाओं की बैठक 29 जुलाई को आहूत की है। उन्होंने बताया कि राजकीय इंटर कॉलेज में अपरान्ह दो बजे से होने वाली बैठक में समस्त प्रधानाचार्य और शिक्षक उपस्थित होना सुनिश्चित करें।
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