शाहजहांपुर। कैंसर जानलेवा बीमारी जरूर है मगर असाध्य नहीं। सतर्कता, सही इलाज और मजबूत इच्छाशक्ति के जरिये इस बीमारी को मात देना संभव है। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को हराया और दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बने।
केरूगंज के रहने वाले वेदप्रकाश अग्रवाल बताते हैं कि उनको 65 वर्ष की उम्र में शरीर में भयंकर दर्द उठा। उनकी बेटी डॉ. सोना अग्रवाल ने तुरंत ही जांच कराने की सलाह दी। मुंबई के राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट पहुंचकर जांचें कराईं। लिंफोमा कैंसर की पुष्टि होने पर इलाज शुरू हुआ। इस बीमारी में दुर्लभ दवाएं चलती हैं। यह दवा दिल्ली के भामा सेंटर पर बनकर प्लेन से मुंबई पहुंचती थी। इसको 15 घंटे के अंदर प्रयोग करना होता था। महीने में एक बार दवा को डिप के माध्यम से चढ़ाया जाता था। 50 दिनों तक रेडिएशन एक्सरे से सिंकाई कर कैंसर का विषाणु खत्म किया गया। पूरी तरह से सही होने में एक साल का समय लगा। अब उन्हें किसी तरह की समस्या नहीं होती है। उन्होंने बताया कि इस दौरान परिवार उनका संबल बना। उन्होंने डॉक्टर की सारी सलाह मानी और इलाज के दौरान अपना मनोबल कम नहीं होने दिया। उन्होंने कैंसरग्रस्त लोगों को सलाह दी है कि जैसे ही कैंसर का पता चले, उसका इलाज शुरू करा दें। खुद चलते-फिरते रहें और योग करते रहे। इच्छाशक्ति मजबूत रखें। मानकर चलें कि कैंसर को हराया जा सकता है।
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मनोज के डर से बढ़ता गया गाल का कैंसर
चौक क्षेत्र में क्रॉकरी के व्यापारी मनोज शर्मा बताते हैं कि 54 साल की उम्र में गाल पर सफेद दाग पड़ गया था। जांच कराई तो कैंसर की पुष्टि हुई। इससे वह डर गए। उनकी गृहस्थी भी कच्ची थी, इसलिए इलाज नहीं कराया। इससे कैंसर बढ़ता चला गया और दाढ़ पूरी तरह से गल गई। तब मुंबई में राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट गए। जहां डॉक्टर ने कहा कि वह ऑपरेशन कर कैंसर को ठीक कर देंगे, लेकिन वह बोल सकेंगे या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। ऑपरेशन होने पर पूरी दाढ़ निकाल दी गई। खाने-पीने के लिए एक नली डाल दी गई। डॉक्टर ने बोला कि जितना जल्दी हो सके नली के बिना खाना शुरू कर दें। 15 दिन में नली खुद निकल गई और वह खाने-पीने लगे। अगर वह डरते नहीं और शुरुआत में ही इलाज करा लेते तो ज्यादा परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। उन्होंने कैंसर पीड़ितों से अपील की है कि डरें नहीं, तुरंत इलाज कराने से यह बीमारी ठीक हो जाती है।
बहन ने दिया साथ, कैंसर पर पा ली जीत
मदनापुर के कर्णपुर पड़री निवासी भूपेंद्र सिंह की 27 वर्षीय बेटी शिखा सिंह ने ब्रेस्ट कैंसर पर विजय प्राप्त कर ली। केमिस्ट्री से बीएड शिखा ने दिक्कत होने पर लखनऊ में अपनी जांच कराई। जहां स्टेज-टू का कैंसर होने की जानकारी होने पर हिम्मत टूट गई। बाद में किसी तरह हिम्मत बटोरी। परिवार के लोगों ने संबल देते हुए साथ दिया। शिखा ने मुंबई में अपनी सर्जरी कराई। अक्तूबर माह में उनका उपचार पूर्ण हुआ। उनकी सहयोगी बहन रिचा ने हर पल साथ दिया और कैंसर से जंग जीतने के लिए मनोबल ऊंचा रखा। शिखा बताती हैं कि कैंसर रोग से पीड़ित होने की जानकारी होने पर एक बार लगा था कि जिंदगी खत्म हो गई, लेकिन जब हिम्मत जुटाई तो कैंसर को हरा दिया।
मनोज शर्मा
मनोज शर्मा