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आज जहां है जलालाबाद तहसील, वहां था कभी ऐतिहासिक किला

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शाहजहांपुर। बहुत कम लोग जानते हैं कि वर्तमान में जहां जलालाबाद तहसील है, वहां पर कभी 18 वीं शताब्दी में भव्य किला था। 1857 की लड़ाई में किला क्रांतिकारी गतिविधियों का बड़ा केंद्र रहा। यहां क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। बाद में अंग्रेजों ने दमनकारी नीति अपनाते हुए किले के अधिकतर भाग को जमींदोज कर दिया।
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जिले के ही भूभाग पर आज तहसील स्थापित है। कहा जाता है कि इस किले का निर्माण रुहेला नेता हाफिज रहमत खां ने 18वीं शताब्दी के मध्य में कराया था। पर शाहजहांपुर गजेटियर के अनुसार इस स्थान पर वाछिल राजपूतों का किला था, हाफिज रहमत खां ने इसे दोबारा बनवाया।
किला सात मीटर ऊंचाई पर था। किले में शाहबाद की ओर जाने वाली एक सुरंग थी जो बंद कर दी गई। अधिक ऊंचाई पर होने के कारण पानी के बहाव के लिए कई ढाल बनाए गए। किले के आगे उत्तर की ओर एक तीन गुंबद की मस्जिद थी।
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अप्रैल 1774 में कटरा युद्ध में हाफिज रहमत खां की मृत्यु के बाद इस किले से रुहेलों का नियंत्रण खत्म हो गया तथा किला ब्रिटिश शासन के अधीन हो गया। 1857 की क्रांति के मध्य किला क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र बन गया। पूर्व तहसीलदार अहमद यार खां ने क्रांति का बिगुल बजाया तथा किले को अपने अधीन कर लिया।
अहमद यार खां की प्रार्थना पर बरेली से इस्माइल खां के नेतृत्व में जलालाबाद में आई सेना ने इसी किले को मुख्यालय बनाया। इसी स्थान से उन्होंने ठाकुरों को दबाने के लिए खंडहर पर हमला किया। अनेक ग्रामवासियों को मौत के घाट उतार दिया।
26 अप्रैल 1858 को जब ब्रिटिश सेनाओं ने जलालाबाद में प्रवेश किया तो क्रांतिकारियों ने किले से उनका मुकाबला किया। जलालाबाद पर नियंत्रण करने के उपरांत अंग्रेजों ने किले का बहुत-सा हिस्सा ध्वस्त कर दिया। उन्हें डर था कि ऊंचाई पर होने के कारण क्रांतिकारी फिर से इस पर कब्जा करके ब्रिटिश सैनिकों के सामने समस्या न उत्पन्न कर दें।
सन 1914 में इस स्थान पर पुन: निर्माण कार्य हुआ। किला जलालाबाद तहसील का मुख्यालय बना।
1857 की क्रांति में शाहजहांपुर की बड़ी भूमिका रही थी। 28 अप्रैल 1858 को ब्रिटिश सरकार ने बगैर किसी सुनवाई के राजद्रोह में अहमद यार खां को जलालाबाद के बारह पत्थर चौराहे में फांसी पर लटका दिया था।
इतिहास अध्ययन में रुचि रखने वाले प्रशांत अग्निहोत्री का कहना है कि यहां पर बनी उनकी मजार उपेक्षा का शिकार है। यहां तक जाने के लिए कोई अच्छा रास्ता भी नहीं है। इस मजार का सौंदर्यीकरण कराया जाना चाहिए।
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