अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
- पुलिस में भर्ती होने वाली आसमा बेगम के मेडल देखकर परिवार वाले फूले नहीं समाते
- बिजनौर की निवासी आसमा बेगम महिला थाने में हेड कांस्टेबल के पद पर हैं तैनात
- अब तक पुलिस विभाग की कई प्रतियोगिताओं में खेल के जरिये किया है नाम रोशन
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। महिला थाने की हेड कांस्टेबल आसमा बेगम ने खेल के जरिये शाहजहांपुर पुलिस का नाम जोन में ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों तक में रोशन किया है। परिवार में मां की बंदिशों के बावजूद खेल के प्रति दीवानगी कम नहीं हुई। मां की नाराजगी के बाद भी पुलिस में भर्ती होने वाली आसमा बेगम के मेडल देखकर उनके परिवार के सदस्य भी गर्व करते हैं।
बिजनौर जिले के थाना हल्दौर के मौलविया निवासी आसमा बेगम कक्षा छह से ही विभिन्न खेलों की स्पर्धाओं में शामिल होती थीं। पिता अब्दुल गनी खां सेना में थे। फिर ठेकेदारी करने लगे। आसमा की मां आफताब बेगम को बेटी के खेल में शामिल होना पसंद नहीं था पर आईजी आफिस में कार्यरत दरोगा मामा कौसर अली खां ने हमेशा प्रेरित किया। उनके समर्थन के चलते वह जिले से लेकर स्टेट तक विभिन्न खेलों में भाग लेती थीं।
आसमा बताती हैं कि जब उनकी बड़ी बहन शहंशाह बेगम की ज्वाइनिंग पुलिस में हुई तो अम्मी को काफी खराब लगा। अम्मी खूब रोई थीं। इसके बाद 1991 में बरेली से आसमा ने भी सिपाही के पद पर नौकरी हासिल कर ली। हालांकि तब उन्हें अपनी मां के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा था। पुलिस में भर्ती होने के बाद भी आसमा ने अपने खेल के शौक को जीवित रखा। उन्होंने पुलिस विभाग की खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। डिस्कस थ्रो, हैमर थ्रो, जैवलिन थ्रो व टीम गेम में कबड्डी में अपनी प्रतिभा दिखाते हुए विभाग के लिए कई मेडल जीते।
आसमा ने बताया कि वह अब तक पांच नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। कोलकाता में ओपेन मास्टर एथलीट नेशनल प्रतियोगिता में उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया था। उन्हें इंडियन पुलिस के लिए खेलने का मौका मिला, लेकिन बच्चों की देखभाल के लिए दो महीने घर छोड़ने की वजह से इन्कार कर दिया। वह अगले साल होने वाली इंडिया स्तर की प्रतियोगिता के लिए तैयारी कर रहीं हैं।
दुष्कर्म के आरोपी को अकेले पकड़ने पर मिला था पांच हजार का इनाम
आसमा बेगम के पति इस्लाम उल हक शहर में फायर विभाग में तैनात हैं। आसमा खेलों के अलावा अपनी ड्यूटी के लिए काफी जागरूक हैं। उन्होंने दुष्कर्म के एक आरोपी को अकेले गिरफ्तार किया था। बदायूं में एसपी कार्यालय में तैनाती के दौरान आसमा के इस साहसिक काम के चलते एसपी सुनील कुमार ने पांच हजार का नकद पुरस्कार दिया था।
अवसाद में आईं नम्रता ने खुद को संभाला, बिजनेस शुरू कर दूसरों को दिया सहारा
शाहजहांपुर। शहर के सिटी पार्क निवासी नम्रता सिंह के सामने कुछ समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा। जन्म के कुछ समय के बाद बेटी की मौत ने उन्हें तोड़ दिया। नम्रता ने खुद को संभाला और खुद का बिजनेस शुरू कर दूसरों को सहारा दिया। फेसबुक लाइव के जरिये लोगों से जुड़ीं और 50 महिलाओं की रोजी-रोटी देने का काम किया।
नगर निगम में कार्यरत विनय प्रताप सिंह की पत्नी नम्रता सिंह पीसीएस की तैयारी कर रहीं थीं। कई बार प्रयास करने के बाद भी पीसीएस में कामयाबी नहीं मिली। इसे लेकर पहले से अवसाद में थीं। इस बीच बेटी को जन्म दिया। बेटी की एक आंख बंद थी। उसका उपचार कराया। पीजीआई में बेटी की मौत हो गई। पहले से परेशान नम्रता बेटी की मौत के गम में डिप्रेशन में चली गईं।
उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक अरुण पांडेय की मदद से पांच लाख का लोन स्वीकृत कराया। नम्रता ने लोदीपुर, जलालाबाद, पुवायां और बंडा की करीब 50 महिलाओं को जोड़कर जरी-जरदोजी के तहत वस्त्रों का कारोबार शुरू किया। उन्होंने फेसबुक पर एक पेज बनाया। उसके जरिये लोगों से संपर्क साधा। इसके बाद वस्त्रों के ग्राहकों के साथ ऑर्डर भी मिलने लगे। नम्रता बताती हैं कि बेटी की मौत के बाद खुद को व्यस्त रखने के लिए कारोबार शुरू किया था। यह अन्य महिलाओं की रोजी-रोटी का जरिया बन गया। संवाद
शाहजहांपुर में रेडिमेड कपड़ों को दिखाते नम्रता सिंह।