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गंगा, रामगंगा के जलस्तर घटने के बावजूद तटीय गांवों में बाढ़ कायम

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शाहजहांपुर। गंगा और रामगंगा के जलस्तर में रविवार को तीसरे दिन भी गिरावट के बावजूद मिर्जापुर और परौर क्षेत्र के तटीय गांवों में बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां कम नहीं हुईं हैं। रामगंगा के किनारे बीघापुर की नई बस्ती और गंगा के किनारे बसे आजादनगर, इस्लामनगर आदि गांवों को आने-जाने के रास्ते जलमग्न हैं और वहां घरों में घुसा पानी अभी नहीं निकल सका है।
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कलान तहसील में चौंरा-इस्लामनगर संपर्क मार्ग से बाढ़ का पानी उतर गया है। जलालाबाद-ढाईघाट, एटा-मैनपुरी स्टेट हाईवे पर अभी बाढ़ का पानी है। बीघापुर पूर्वी के ग्रामीणों को अभी तीन से चार फिट गहरे अंधुइया नाले को तैर कर पार करना पड़ रहा है। मिर्जापुर, कुतुलूपुर, आलमगंज, तारापुर, पहरुआ, हरिहरपुर आदि गांवों के खेतों में पानी से डूबकर धान, मूंगफली, बाजरा, धान, उर्द, तिल आदि फसलें नष्ट हो गईं हैं। कुछ किसानों ने धान की हरी फसल डूबकर नष्ट हो जाने के भय से कच्ची फसल काट ली है, लेकिन वह भी सूख नहीं पाने से सड़ रही है।
दोनों तटों पर भूमि कटान कर रही रामगंगा
परौर। अभी तक क्षेत्र के लोग रामगंगा की बाढ़ से जूझते रहे लेकिन अब जलस्तर घटने के साथ नदी ने दोनों किनारों पर भूमि कटान शुरू कर दिया है। रामगंगा में पानी जैसे-जैसे कम हो रहा है, किनारों पर पानी का तेज बहाव नारायणनगर, मोहनपुर, बिचपुरी, दहेलिया आदि गांवों की उपजाऊ जमीन काट रहा है। रामगंगा ने दूसरे छोर पर इन गांवों के नत्थू सिंह गुर्जर, राजीव सिंह चौहान, सोनपाल, जगपाल सिंह राठौर, जय सिंह यादव, उदयवीर, दलवीर सिंह आदि किसानों के खेतों को काटकर तहस-नहस कर दिया है।
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बाढ़ और बारिश से दो फीसदी फसलें प्रभावित होने का अनुमान
शाहजहांपुर। पिछले सप्ताह चक्रवाती वर्षा और उसी के साथ गंगा, रामगंगा समेत अन्य नदियों में आई बाढ़ ने फसली नुकसान बढ़ा दिया है। हालांकि, अभी फसलों का सर्वे शुरू नहीं हुआ है लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जलालाबाद व कलान तहसील में धान समेत तिल, मूंगफली, शकरकंद आदि फसलों को भारी क्षति पहुंची है। अधिकारियों ने दो फीसदी फसली क्षति का आरंभिक अनुमान जताया है जो सूखा प्रभावित फसलों की तुलना में दो गुना है। एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी के अनुसार नदियों के किनारे खेतों में भरा पानी निकलने के तुरंत बाद फसलों का सर्वे शुरू करा दिया जाएगा। उप कृषि निदेशक धीरेेंद्र सिंह के अनुसार सर्वे होने के बाद ही फसलों के वास्तविक नुकसान के बारे में कुछ कहना संभव होगा। संवाद
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