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Shahjahanpur News: सिर्फ कहने के लिए प्रसव केंद्र... बुनियादी सुविधाएं नदारद

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अल्हागंज सीएचसी परिसर में उगीं झाड़ियां। संवाद
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शाहजहांपुर। ग्रामीण स्तर पर गर्भवती महिलाओं को लाभ देने के उद्देश्य से 14 प्रसव केंद्र आधी-अधूरी तैयारियाें के बीच बना दिए गए, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हैं। ऐसे में महिलाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। केंद्रों पर बिजली, पानी और एंबुलेंस से लेकर स्टाफ तक का अभाव है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए मुख्यालय ले जाना पड़ रहा है। शुक्रवार को पड़ताल की गई तो कई अव्यवस्थाएं सामने आईं।
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जलालाबाद के गांव चौकी साहबगंज स्थित पीएचसी में डेढ़ महीने पहले आधी-अधूरी व्यवस्थाओं के बीच महिलाओं के प्रसव के लिए डिलीवरी केंद्र की शुरुआत की गई। यहां पर स्टाफ नर्स अक्षरा मिश्रा की तैनाती है, लेकिन केंद्र गर्भवती महिलाओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। यहां पर अब तक मात्र छह महिलाओं का ही प्रसव हुआ है। दो कमरों में संचालित केंद्र में जनरेटर न होने के कारण महिलाओं को प्रसव की सुविधा दिन में ही उपलब्ध हो पाती है।
कांट के हटीपुर कुर्रिया में प्रसव केंद्र में अगस्त महीने में मात्र तीन प्रसव हुए हैं। सितंबर में 12 दिन बीतने के बाद कोई प्रसव नहीं हुआ। यहां पर डॉ.बीपी शर्मा की तैनाती है, पर एंबुलेंस तक की सुविधा नहीं है।
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निगोही के परसौना खलीलपुर के अतिरिक्त पीएचसी को प्रसव केंद्र बना देने के बाद भी क्षेत्र के लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। निगोही सीएचसी से करीब दस किमी दूर प्रसव केंद्र पर आयुष डॉक्टर, एक नर्स, स्टाफ नर्स की तैनाती है, लेकिन पीएचसी के पास बने आवास ठीक नहीं हैं। बिजली- पानी नहीं होने से स्टाफ के रात में नहीं रुकने के चलते प्रसव दिन में होते हैं। अगस्त माह से 11 सितंबर तक मात्र तीन ही प्रसव हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रसूता को निगोही सीएचसी ले जाना पड़ता है।

अल्हागंज सीएचसी में गंदगी का अंबार

अल्हागंज सीएचसी में प्रसव कराना काफी खतरनाक है। यहां पर गंदगी रहने से संक्रमण का खतरा रहता है। महीने में लगभग 70 प्रसव होने का दावा किया जाता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर बिजली तक की उचित व्यवस्था नहीं है। स्टाफ नर्स तक नहीं है। प्रसव वार्ड के बगल में झाड़ियां उगी हैं। गंदगी भी फैली है। जैतीपुर सीएचसी में महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को गंभीर स्थिति में रेफर करना पड़ता है। गढि़या रंगीन का डभौरा, खेड़ा रठ पीएचसी में स्टाफ नर्स प्रसव करातीं हैं।
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खंडहर हो गया अस्पताल, नहीं ले रहे सुध
खुदागंज में पीएचसी हसनापुर में राजकीय आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक चिकित्सालय का संचालन होता है। यहां पर रोजाना 20 से 30 मरीजों का आना होता है, लेकिन भवन खंडहर हो गया है। भवन की मरम्मत को छोड़िए, रंगाई-पुताई तक नहीं हुई है। काई जमने से दीवारें काली पड़ गईं हैं। यहां पर प्रसव केंद्र बनाया गया है लेकिन प्रसव नहीं हो रहे हैं।

अप्रैल से सितंबर तक सीएचसी और जिला अस्पताल में हुए प्रसव
-14374 संस्थागत प्रसव
-741 सिजेरियन

राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रसव के आंकड़े
वर्ष संस्थागत प्रसव सिजेरियन

2023 5883 701

2024 5175 890

2025 2590 550

सीमित संसाधनों के बीच प्रसव केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। स्टाफ की कमी है, फिर भी सभी जगह पर स्टाफ नर्स व एएनएम के जरिये व्यवस्था की गई। जहां पर कमियां हैं, उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा।
- डॉ.पीपी श्रीवास्तव, एसीएमओ

अल्हागंज सीएचसी परिसर में उगीं झाड़ियां। संवाद

अल्हागंज सीएचसी परिसर में उगीं झाड़ियां। संवाद

अल्हागंज सीएचसी परिसर में उगीं झाड़ियां। संवाद

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