प्रदेश में एक जुलाई से लागू होे रहे गुड्स सर्विस टैक्स के दायरे में आने वाले व्यापारियों ने जीएसटी पंजीकरण का मनमाना शुल्क लेने का कड़ा विरोध किया है। उद्योग व्यापार मंडल (मिश्रा गुट) के पदाधिकारियोें की रविवार को हुई बैठक मेें यही मुद्दा छाया रहा। व्यापारी नेताओं ने वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों से कैंप लगाकर ऑनलाइन पंजीकरण कराने वाले व्यापारियों से 2500 के बजाय पांच सौ रुपये शुल्क लिए जाने और अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की।
जीएसटी पर चर्चा करते हुए संगठन के नगर चेयरमैन मुकेश मोदी ने कहा कि जीएसटी लागू करने को लेकर व्यापारियों में कोई विरोध नहीं है, लेकिन इसके लिए वाणिज्य कर विभाग से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से व्यापारियों में रोष पनप रहा है। नगर अध्यक्ष सुनील गुप्ता ने वाणिज्य कर उपायुक्तों से हुई वार्ता का उल्लेेख करते हुए बताया कि जिले में 10500 व्यापारी वैट में पंजीकृत हैं। इनमें से 7500 व्यापारी जीएसटी में पंजीकरण की पहले चरण की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। एक हजार अन्य व्यापारी द्वितीय चरण में माइग्रेशन कराकर एआरएन नंबर ले चुके हैं। इसके बावजूद तमाम व्यापारियों का पंजीकरण और एआरएन नंबर आवंटित होेना शेेष है।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह दुआ ने कहा कि जितने अधिक व्यापारी इनरोलमेंट कराएंगे, विभाग और सरकार को उतना ही अधिक कर राजस्व प्र्राप्त होगा। उन्होंने व्यापारियों के हित में पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 जून को आगे बढ़ाने और पंजीकरण शुल्क में कमी करने की शासन से मांग की। नगर अध्यक्ष ने बताया कि व्यापारियोें की सुविधा के लिए संगठन के आईटी प्रकोष्ठ के संयोजक संतोष गुप्ता के सहयोग से वाणिज्य कर कार्यालय में मंगलवार से रोजाना विशेष शिविर लगाया जाएगा। इस मौके पर धर्मपाल रैना, अजय कुमार, लक्ष्मण प्रसाद, राजीव कमरा, राकेश वर्मा, सुल्तान खां, मोहम्मद ताहिर अंसारी, वेद प्रकाश रावत, विकास अग्रवाल, सिद्धार्थ गोयल, चंद्र प्रकाश गुलाटी, सोनू सिंह, सतीश आनंद, सतनाम चावला, नबी अहमद, अजय कुमार, मो. नाजिम खां, नमित गुप्ता आदि उपस्थित रहे।