शाहजहांपुर। बच्चों को सर्दी और जुकाम होने पर लापरवाही बरतना उचित नहीं है। यही छोटी दिक्कतेंं उनके कानों की क्षमता पर असर डाल रही हैं। लगातार ईयरफोन लगाना भी कानों पर गंभीर असर डाल रहा है। वाहनों के प्रेशर हॉर्न, डीजे और बैंड की तेज आवाज लोगों को बहरेपन की बीमारी बांट रही है। ऐसी स्थिति में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक राजकीय मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में उपचार कराने पहुंच रहे हैं।
विशेषज्ञ के मुताबिक, 55 से 60 साल की उम्र पार करने के बाद कान की कोशिकाएं कमजोर होने पर लोगों को कम सुनाई देने लगता है। इसी तरह बच्चों को लगातार जुकाम रहने का असर भी कानों पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चे भी कान के रोगी बन रहे हैं। उनकी ईयरफोन लगाने की आदत कानों पर गंभीर असर डाल रही है। कान रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम ओमर ने बताया कि जुकाम, कान बहने के कारण चार से पांच साल तक के बच्चे कान के रोगी बन रहे हैं। कम सुनाई देना, कानों में झनझनाहट, आवाज गूंजना, सुनने की क्षमता कम होना, किसी बात को बार-बार पूछने आदि की दिक्कतें मरीजों को होती हैं।
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फैक्ट फाइल
रोजाना 100 से 150 मरीज ईएनटी विभाग में पहुंचते हैं।
-20 डेसिबल तक युवाओं के सुनने की क्षमता होती है।
-60 से 65 डेसिबल तक पहुंच रहा ध्वनि प्रदूषण।
कान बहने पर ये बरतें सावधानी
-कान में पानी न जाने दें और किसी प्रकार का तरल पदार्थ डालने से बचें।
-मवाद को नरम कपड़े से साफ करें, बदबू या खून आना गंभीर रोग के लक्षण हो सकते हैं।
-कान में मवाद आने से बहरापन जैसा रोग होने की संभावना बनी रहती है।
कानों की करें देखभाल
-कान में कभी भी नुकीली वस्तु न डालें।
-बच्चे या वयस्क के कान पर मारने से बचें।
-गंदा पानी कान में बिल्कुल न आने दें।
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-कान हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। इसकी देखभाल करना चाहिए। वर्तमान समय में बच्चों के साथ बुजुर्ग तक कई तरह की कान की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। दिक्कत आने पर डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें। - डॉ. पूनम ओमर, ईएनटी विभागाध्यक्ष राजकीय मेडिकल कॉलेज