खुटार क्षेत्र में दलितों के नाम फर्जी कर्ज तरीके से निकालकर अनुदान राशि हड़प जाने वाले लोग जांच से बचने के उपाय तलाशने में जुट गए हैं।
गौरतलब है कि खुटार क्षेत्र में तमाम दलितों के नाम 20-20 हजार रुपए का कर्ज फर्जी रूप से निकाल लिए जाने का आरोप है। वर्ष 2006-07 में सरकार की ओर से दलितों को रोजगार के लिए राशि दिए जाने और बाद में अनुदान के रूप में कर्ज की राशि को सरकार की ओर से जमा कराया गया था। खुटार की जिला सहकारी बैंक की ओर से तमाम लोगों को कर्ज दिया गया, लेकिन लाभार्थी कह रहे हैं कि राशन कार्ड नवीनीकरण आदि के नाम पर उनसे पहचान और पते का प्रमाणपत्र, फोटो आदि लेने के बाद बैंककर्मियों से मिलकर दलालों ने राशि निकाल ली। अनुदान मिलते ही खातों को बंद करा दिया गया।
शिकायत के बाद मामले की जांच जिला सहकारी बैंक के डीजीएम सच्चिदानंद दुबे कर रहे हैं। गर्दन फंसती देख दलालों और पूर्व में बैंक में तैनात रहे कुछ कर्मियों ने एक टाइपशुदा कागज पर कथित लाभार्थियों के हस्ताक्षर, अंगूठा लगवाना शुरू कर दिया गया है। इस कागज पर लिखा है कि उन्होंने पूर्व में 20 हजार का कर्ज लिया था। लोगों को बताया जा रहा है कि हस्ताक्षर अंगूठा नहीं करने पर कर्ज भरना पड़ेगा। पढ़े लोगों ने कागज पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया है, लेकिन बिना पढ़े लिखे कुछ लोग कार्रवाई के डर से अंगूठा लगा रहे हैं। उधर फर्जीवाड़े का शिकार हुए गांव गुरघिया के लोगों ने मंडलायुक्त को पत्र देकर जांच किसी अन्य विभाग के अधिकारी से कराने की मांग की है। डीजीएम ने कहा कि जिन लोगों ने योजना का लाभ लिया है वह कागज पर हस्ताक्षर या अंगूठा लगा दें।