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परमवीर चक्र विजेता नायक जदुनाथ सिंह को सैन्य अधिकारियों ने दी भावपूर्ण श्रद्घांजलि

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बाराकलां (कलान)। परमवीर चक्र विजेता नायक जदुनाथ सिंह का शनिवार को 74वां बलिदान दिवस मनाया यगा। इस अवसर पर शनिवार को उनके पैतृक गांव खजुरी पहुंचे फतेहगढ़ छावनी (फर्रुखाबाद) स्थित राजपूत रेजीमेंट के ब्रिगेडियर इंद्र मोहन सिंह परमार ने शहीद को भावपूर्ण श्रद्घांजलि दी। इस अवसर पर कई अधिकारी और नेता मौजूद रहे।
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खजुरी में राजपूत रेजीमेंट के सैन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने बलिदान दिवस समारोह की तैयारियां चार दिन पहले से ही शुरू कर दी थी। शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर ब्रिगेडियर परमार ने बताया कि परमवीर चक्र विजेता नायक जदुनाथ सिंह आज ही के दिन नौशेरा सेक्टर की भारतीय चौकी को पाकिस्तानी हमले से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उन्होंने कहा कि नायक जदुनाथ सिंह और उनके साथियों ने जिस युद्घ कौशल और बहादुरी का प्रदर्शन किया, वह राजपूत रेजीमेंट सहित देश के लिए गौरव की बात है। इस मौके पर उन्होंने शहीद परिवार के ही सदस्य मेंबर पाल सिंह, नेत्रपाल सिंह, गुन्ना देवी आदि को उपहार भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में कैप्टन अतुल कुमार कुलश्रेष्ठ, लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील कुमार, सूबेदार मेजर हरिपाल सिंह, जालिम सिंह,
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद, विधायक मानवेंद्र सिंह, एसडीएम बरखा सिंह आदि ने शहीद की प्रतिमा पर श्रद्घा के फूल अर्पित कर उन्हें नमन किया। कैप्टन कुलश्रेष्ठ ने कहा पिता बीरबल सिंह के घर माता जमुना कुंवरि की कोख से जन्मे जदुनाथ सिंह छह भाई और एक बहन में तीसरे नंबर के थे। गांव के स्कूल में वह चौथी कक्षा तक पढ़े, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण अपनी शिक्षा आगे नहीं बढ़ा सके। उन्होंने बचपन का अधिकांश समय खेत में कृषि कार्य करके बिताया। हनुमान जी के भक्त जदुनाथ सिंह ने शादी भी नहीं की और 17-18 वर्ष की आयु में घर से बिना बताए चले गए। परिवार वालों को कुछ दिन बाद ढूंढ़ने पर पता चला कि वह फतेहगढ़ की राजपूत रेजीमेंट में सिपाही के पद पर अपनी ट्रेनिंग कर रहे थे। सन् 1941 में उन्हें ब्रिटिश-भारतीय सेना में शामिल किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने बर्मा (वर्तमान म्यामार) में जापान के खिलाफ लड़ाई में भाग लिया था।
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कैप्टेन कुलश्रेष्ठ के अनुसार बाद में भारतीय सेना के सदस्य के रूप में 1947 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया। छह फरवरी 1948 को नौशेरा सेक्टर में युद्ध के दौरान उन्होंने देश के प्राण न्यौछावर कर दिए। तत्पश्चात उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।इस अवसर पर भाजपा के कलान मंडल अध्यक्ष संजय सिंह, सीओ परमानंद पांडेय, कलान के खंड विकास अधिकारी रामशंकर, कपिल चौधरी, महिपाल सिंह, सत्यवीर सिंह, दिनेश कुमार, तेजपाल, जागेश्वर, पहलवान, प्रमोद, ओम प्रकाश सिंह, वेद राम, इन्द्र कुमार सिंह, राजेंद्र राज बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।
सात दशक बाद भी शहीद का गांव उपेक्षित
नायक जदुनाथ सिंह को शहीद हुए अब तक 74 साल हो चुके हैं, लेकिन गांव के हालात जस के तस बने हुए हैं। शहीदपरिवार के नेत्रपाल, गुड्डू आदि के अनुसार प्रदेश सरकार ने शहीद सैनिकों के गांवों के लिए कई सुविधाएं लागू कीं, लेकिन खजुरी के लोग आज भी उन सुविधाओं से वंचित हैं। 2014 में सांसद के तौर कृष्णा राज ने जीत हासिल की थी और खजुरी गांव को उन्होंने गोद ले लिया था, इसके बाद भी गांव की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। आधे गांव में आज भी वही गंदगी से भरी नालियां और दशकों पहले पड़ा खड़ंजा जर्जर हो चुका है। हर साल बलिदान दिवस पर शहीद को श्रद्धांजलि देने आला अफसर आते हैं और बड़े-बड़े वादे कर चले जाते हैं, लेकिन बाद में पीछे मुड़कर कोई नहीं देखता। उनके नाम पर स्वीकृत बिजली उपकेंद्र का कोई पता नहीं है।
डीएम, एसपी समेत अधिकारियों ने अर्पित की पुष्पांजलि
शाहजहांपुर। कलक्ट्रेट में जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय परिसर में स्थापित नायक जदुनाथ की प्रतिमा डीएम इंद्र विक्रम सिंह, एसपी एस आनंद, सीडीओ प्रेरणा शर्मा, एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी, एडीएम फाइनेंस गिरिजेश कुमार चौधरी, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार आदि अधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदको नमन किया। इस अवसर पर पूर्व सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल केके चौधरी, सेना मेडल कमांडर दिनेश कुमार मिश्र, कर्नल एके शुक्ला, मेजर टीएनएस तोमर, भूतपूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष एमएम वर्मा, मदन मुरारी, सुनीता वर्मा, सतपाल सिंह, अरुण कुमार, राम गोपाल आदि भूतपूर्व सैनिकों और कर्मचारियों ने शहीद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। संवाद
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