शाहजहांपुर। नौ मोहर्रम को शहीदाने कर्बला को खिराज पेश किया गया। इस दौरान मुस्लिमों ने घरों में नज्र और नियाज कराकर शीरीनी और शर्बत तकसीम किया। शासन के निर्देश पर मुस्लिमों ने ताजियादारी नहीं की। इमामबाड़ा दिलाजाक और घूरनतलैया में भी ताजिया की कोई रस्म नहीं अदा की गई। दिन में दोनों इमामबाड़ों के गेट पर ताला पड़ा रहा।
कोरोना वायरस के कारण इस साल मोहर्रम पर होने वाली ताजियादारी भी नहीं हो सकी है, इससे लोगों में मायूसी है। मगर कोरोना से बचाव के लिए और कोई रास्ता न होने के चलते इमामबाड़ा कमेटी के पदाधिकारियों ने लोगों को सादगी के साथ ही मोहर्रम मनाने को कहा। इस पर गाइड लाइन का पालन करते हुए मुसलमानों ने घरों में ही शहीदाने कर्बला को नज्र व फातिहा पेश की। एहतियात के तौर पर इमामबाड़ा दिलाजाक में गेट पर ताला डाल दिया गया। महिलाओं ने इमामबाड़ा गेट पर ही फूलों के हार और मन्नत के धागे बांध कर नज्र व नियाज कराई। इमामबाड़ा कमेटी के पदाधिकारी अनवार हसन खां ने बताया कि सात मोहर्रम को इमामबाड़ा में महिलाओं की भीड़ जुट गई थी। सूचना पर पुलिस ने भीड़ को हटाने और इमामबाड़ा गेट को बंद करने की हिदायत दी थी, जिसके बाद गेट पर ताला डाल दिया गया। बावजूद इसके दूर दराज से लोगों का यहां आना जारी है लेकिन गेट बंद देखकर लोग निराश हैं। शनिवार नौ मोहर्रम को शहीदाने कर्बला को खिराज पेश किया गया।
इधर, इमामबाड़ा घूरनतलैया की देखरेख का जिम्मा संभालने वाले अकील अहमद खां ने बताया कि कोरोना के चलते लोगों को आने से मना किया गया है। रात को पांच-सात लोग आकर नात और नियाज नज्र करेंगे। भीड़ नहीं जुटने दी जाएगी। इसी प्रकार सादगी के साथ मीलाद शरीफ भी होगी। उन्होंने बताया कि सुन्नियों के लिए इमामबाड़ा में आने का समय शाम छह से आठ बजे तक और शिया के लिए रात आठ से नौ बजे तक मुकर्रर किया गया है।