राष्ट्रीय लोकदल और लोकदल के रास्ते भले ही अलग हों, लेकिन बात किसानों के हित की हो तो पार्टी के दोनों धड़ों की वैचारिक साम्यता उनकी गुटबाजी को परे धकेल देती है। इसकी बानगी मंगलवार को कलक्ट्रेट में देखने को मिली। फसली नुकसान से परेशान किसानों को मुआवजा जल्द देने के मुद्दे पर पार्टी के दोनों धड़ों ने सुर में सुर मिलाया। आंदोलन का ऐलान भी किया। फर्क सिर्फ इतना रहा कि मामूली अंतराल में दोनों धड़ों ने अपनी खिचड़ी अलग-अलग पकाई।
इस कड़ी में पहले लोकदल (सुनील सिंह गुट) के जिलाध्यक्ष सत्यपाल मिश्र और पार्टी की निगरानी बोर्ड समिति केप्रदेश अध्यक्ष मस्ताना सिंह ने प्रदीप जैन, राजेश त्रिवेदी, ओमकार सिंह वर्मा, दशरथ सिंह, मुख्त्यार अहमद, सुमन, रागिनी, सरताज खां आदि कार्यकर्ताओं के साथ कलक्ट्रेट कैंपस में इंट्री की। इन सभी ने किसानों को फसली मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर नारेबाजी करके अपने गुस्से का इजहार किया। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट कमलेश द्विवेदी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन और छह सूत्री मांग पत्र सौंपा।
इस दौरान राष्ट्रीय लोकदल (अजीत सिंह गुट) के जिलाध्यक्ष हरिओम यादव पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करके उन्हें ‘वार्म अप’ करने में जुटे रहे। कलक्ट्रेट से लोद कार्यकर्ताओं का काफिला रुखसत होने के करीब दो घंटे बाद रालोद जिलाध्यक्ष भी तमाम कार्यकर्ताओं के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। चूंकि, तब तक सिटी मजिस्ट्रेट क्षेत्र भ्रमण पर निकल चुके थे। इसलिए कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन की रस्म अदायगी से निपटकर एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव को ज्ञापन देकर फसली क्षति की भरपाई करने के साथ किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रति क्विंटल पांच सौ रुपये बोनस देने की मांग की। प्रदर्शन में रालोद किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव गौरव गैतम, युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अमित सक्सेना, मनोज पाल, श्यामा सिंह राजपूत, रेखा रानी, शांति देवी, अमर पाल आदि शामिल रहे।