फसली नुकसान के चलते जिले में चिन्हित अति कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है।
जिला प्रशासन की तरफ से करीब पौन तीन लाख बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जिसमें से 6447 बच्चों को अति कुपोषित चिन्हित किया गया था। इसमें वर्ष 2014 में 164 बच्चों का पोषण पुनर्वास केंद्र में इलाज हुआ। इस वर्ष जनवरी माह में 15, फरवरी में 13, मार्च में आठ बच्चों का पोषण पुनर्वास केंद्र में इलाज किया गया। वर्तमान में पोषण पुनर्वास केंद्र में छह बच्चों का इलाज चल रहा है। इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है कि बारिश की वजह से हुए फसली नुकसान की वजह से किसान अपनी समस्याओं में उलझ गया। ग्राम प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन यह लोग कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे अति कुपोषित बच्चों का जीवन खतरे में पढ़ गया है। पोषण पुनर्वास केंद्र में दस बैड में से चार बैड खाली पड़े हुए है। इससे सरकार के द्वारा चलाए गए इस कार्यक्रम में जरूरतमंदों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।
कुपोषित बच्चों को पीएचसी और सीएचसी पर भी इलाज हो रहा है। पोषण पुनर्वास केंद्र में कम संख्या में पहुंच रहे अति कुपोषित बच्चों बारे जानकारी करने के लिए जांच कराई जाएगी।
-डॉ. उमेश सिंह यादव, सीएमओ