फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर किसान ने लगाई फांसी

Thu, 14 Jan 2016 07:49 PM IST
शाहजहांपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
थाना जलालाबाद क्षेत्र के गांव चंदौरा बहादुरपुर में बुधवार की देर शाम अधेड़ ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के परिवार वालों ने बृहस्पतिवार को एसपी कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए पुलिस पर आरोप लगाया कि भैंसें चोरी जाने की रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर पीड़ित ने फांसी लागाकर आत्महत्या कर ली। एसपी ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं।  
विज्ञापन

मृतक के परिवार वालों के मुताबिक बीती नौ दिसंबर की रात घनश्याम के दो भैंसें घर बाहर से चोरी हो गए थे। घनश्याम ने इस मामले गांव के कुछ लोगों पर शक जताते हुए पुलिस को तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की थी। उधर, आरोपियों ने घनश्याम को भला बुरा कहते हुए धमकाया था। मृतका की पत्नी विमला ने बताया कि धमकी से परेशान उसके पति बुधवार को दोबारा कोतवाली पहुंचे और पुलिस को आरोपियों के द्वारा धमकी देने की जानकारी दी, लेकिन पुलिस ने उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। इससे परेशान होकर उसके पति ने आत्महत्या कर ली।
बात दें कि बुधवार की शाम करीब साढ़े छह बजे गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर शिवसरन के खेत में लगे आम के पेड़ में मफलर से घनश्याम का शव लटकता मिला था। देर रात में पुलिस ने गांव में पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। दिन में करीब 11 बजे मृतक के परिवार वाले एसपी कार्यालय पहुंचे और पुलिस पर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी बबलू कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कर सीओ जलालाबाद आदेश त्यागी को जांच के आदेश दे दिए  हैं। इस मामले में जलालाबाद इंस्पेक्टर यतेंद्र भारद्वाज ने बताया कि मृतक ने भैंसे चोरी होने की सूचना न तो उन्हें दी और न ही हल्का के दरोगा अथवा सिपाही को दी। मृतक के परिवार वालों द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं।
विज्ञापन



भैंसें चोरी होने से परेशान थे घनश्याम  
घनश्याम के तीन बेटी 18 वर्षीय मूर्ति, 16 वर्षीय सुभाषनी व 14 वर्षीय शिवांकी और दो बेटे 10 वर्षीय वीरपाल व आठ वर्षीय सचिन हैं। उनके पांचों बच्चों पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ साल पहले घनश्याम बीमार हो गए थे, जिसकी वजह से भारी काम नहीं कर पाते थे। उन्होंने अपने हिस्से की खेती बटाई पर दे रखी थी। वह परिवार का गुजारा भैंस गाड़ी से होने वाली आय से करते थे। जवान हो रही बेटियों की चिंता भी उन्हें सता रही थी। भैंसें चोरी जाने से वह काफी परेशान रहने लगे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें