डीएम विजय किरन आनंद द्वारा जनता को स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन देने के अथक प्रयासों के बावजूद अधिकारी त्रुटिपूर्ण कार्य प्रणाली अपनाने से बाज नहीं आ रहे। इसका सुबूत डीएम के निर्देश पर क्रय केंद्रों के कांटा-बाट की जांच करने पर मिला। मंडी समितियों के 14 क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक कांटों में माप विज्ञान विभाग की फर्जी मोहर लगी पाई गई। इस मामले में सीजेएम कोर्ट में मंडी प्रशासन के विरुद्ध बाट माप अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
क्रय केंद्रों पर किसानों से गेहूं की अधिक तौल किए जाने की शिकायतों की रोकथाम के लिए डीएम आनंद ने विधिक माप विज्ञान अधिकारी विजय मिश्रा को वहां के कांटा-बाट की जांच करने के निर्देश दिए थे। माप विज्ञान अधिकारी ने विभिन्न एजेंसियों के 63 केंद्रों पर दो दिन छापेमारी करके वहां के कांटा-बाट की जांच की तो मंडी समितियों के क्रय केंद्रों पर लगे कांटा-बाट में गड़बड़ी पकड़ ली।
उन्होंने पाया कि वहां इस्तेमाल हो रहे इलेक्ट्रॉनिक कांटों में लगवाई गई मोहर विभाग की न होकर फर्जी है। माप विज्ञान अधिकारी के अनुसार डीएम के टेरर के चलते ऐसे सभी केंद्रों पर तौल सही पाई गई, लेकिन फर्जी मोहर के बारे में रोजा मंडी समिति के सचिव संजय सिंह को जारी नोटिस का उत्तर नहीं मिला। उन्होंने बताया कि इस संबंध में गेहूं खरीद के प्रभारी अधिकारी के नाते एडीएम वित्त एवं राजस्व पीेके श्रीवास्तव को रिपोर्ट सौंपकर मंडी प्रशासन के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में बांट माप अधिनियम की धारा 44 के तहत वाद दायर करा दिया गया है।
चांदापुर समिति सेंटर पर पकड़ी गई बढ़तौली
माप विज्ञान अधिकारी के अनुसार चांदापुर में मंडी समिति के क्रय केंद्र की जांच करने पर पता चला कि वहां लगे कांटा पर किसानों से प्रति बोरा 700 से 800 ग्राम गेहूं अधिक तौला जा रहा है। वहां का कांटा-बांट भी फर्जी मोहर लगा पाया गया। किसानों से गेहूं की बढ़तौली किए जाने से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
मान्यता प्राप्त निजी कंपनी से लगवाई मोहर
माप विज्ञान अधिकारी से इलेक्ट्रॉनिक कांटों पर मोहर लगाकर नियत शुल्क लेने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने दस बिंदुओं पर सूचनाएं मांगकर मोहर प्रक्रिया को जटिल बना दिया। इसीलिए गत तीन साल से बरेली की एक मान्यता प्राप्त निजी कंपनी से तौल कांटों पर मोहर लगवाकर उसी कंपनी की प्रमाणित प्लेट लगवाई जा रही है। इस मामले में कंपनी को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए न कि मुझे। अवसर मिलने पर न्यायालय में अपना पक्ष रखूंगा।
-संजय सिंह, सचिव, रोजा मंडी सचिव