पुवायां में पूर्व प्रधान पति की आठ अगस्त को हुई हत्या में शामिल इनामी शूटर को पुलिस ने शुक्रवार रात मुठभेड़ के बाद दबोच लिया। हत्या, मुठभेड़ में फरार होने, दूसरी बार मुठभेड़ में पुलिस पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग करने और तमंचा बरामद होने पर उसे चार मामलों में जेल भेजा गया है।
पुवायां के गांव बखत्यारपुर निवासी गुरदेव सिंह की आठ अगस्त 17 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच में सामने आया था कि जमीनी विवाद के चलते गांव बेला छेदा के कुछ लोगों ने सुपारी देकर हरदोई के शूटरों से गुरदेव की हत्या कराई थी। सुपारी देने में हरदोई के मूल निवासी और कई वर्ष से पुवायां में रह रहे एक महात्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मामले में पांच लोगों को जेल भेजा जा चुका है।
एसआई सुनील कुमार यादव की ओर से दर्ज रिपोर्ट में बताया गया है कि शुक्रवार रात वह सिपाही पिंटू गुर्जर, मोहित भाटी, अंकित कुमार के साथ गश्त पर थे। पुवायां के जेंबा चौराहे के पास उन लोगों को क्राइम ब्रांच की टीम के एसआई क्रांतिवीर सिंह, आसिफ अली, सिपाही अमरजीत, जयप्रकाश, सचिन कुमार, अब्दुल कादिर, विजय प्रताप आदि मिल गए। इस दौरान सूचना मिली कि आठ अगस्त को गांव बख्त्यारपुर के गुरदेव की हत्या में शामिल हनीफ व महात्मा को जोसन फार्म से पुवायां की ओर आते देखा गया है। पुलिस टीम ने बसई तिराहे के पास घेराबंदी कर सामने से आ रहे दो लोगों को रुकने को कहा तो दोनों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने अपने को बचाते हुए एक व्यक्ति को पकड़ लिया, जबकि दूसरा अंधेरे का लाभ उठाकर भाग निकला।
पकड़े गए हरदोई के थाना पिहानी के गांव गजुआखेड़ा निवासी हनीफ उर्फ राजू के पास से एक तमंचा, चार कारतूस और एक खोखा बरामद हुआ। हनीफ ने बताया कि भाग निकला व्यक्ति हरादोई के थाना टडिय़ावां के गांव टेनी का महात्मा उर्फ नन्हे था। हनीफ ने पूछताछ में बताया कि उसने गजुआखेड़ा के रतनेश, महात्मा उर्फ नन्हें के गांव के मनोज के साथ मिलकर महात्मा के कहने पर गुरदेव की हत्या की थी। इसके लिए उन लोगों को सुपारी दी गई थी। पुलिस ने हनीफ को जेल भेज दिया है।
राजू पुत्र श्रीकृष्ण बनकर रह रहा था हनीफ
हनीफ और उसके साथी शूटर बेहद ही शातिर और अपराधी किस्म के हैं। गुरदेव की हत्या के बाद हनीफ के साथी पकड़ गए थे। पुलिस की लगातर दबिशें होने पर हनीफ हरदोई के ही संडीला क्षेत्र में हिंदू बनकर रहने लगा था। उसने अपना नाम राजू पुत्र श्रीकृष्ण रख लिया था। हनीफ अपने साथी महात्मा के साथ किसी काम से गांव बखत्यारपुर नहीं आता और मामले की जानकारी पुलिस को न मिलती तो उसे पकड़ा जाना काफी मुश्किल था।