सन् 2010 में युवती की मौत के एक मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए लड़की की मां ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 27 मार्च की तारीख मुकर्रर की है।
लखीमपुर खीरी के गौरीफंटा थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने सीजेएम की अदालत में मंगलवार को सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इसमें कहा गया है कि इनकी पुत्री वर्ष 2010 में विनोबा सेवा आश्रम में आवासीय स्कूल की छात्रा थी। वहां मोहित नामक व्यक्ति लड़की पर बुरी नीयत रखता था। इस बात की शिकायत जब महिला आश्रम में करने गई तो पता चला कि उनकी पुत्री और आठ अन्य लड़कियोें को ये लोग महाराष्ट्र घुमाने को ले गए थे। एक महीने के बाद चार जनवरी 2010 को लड़की के लौटने पर जब वे उससे स्कूल में मिलीं तो लड़की ने बताया कि उसे बहाने से मुंबई ले जाया गया जहां एक स्थान पर उसे बंद कर दिया गया। आरोप यह भी है कि उक्त व्यक्ति और अन्य कई लोगों ने उसकी पुत्री और अन्य लड़कियों के साथ एक माह तक दुष्कर्म भी किया। मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी भी दी। जब मां ने लड़की को आश्रम से ले जाना चाहा तो आरोपियों ने बच्ची को नहीं ले जाने दिया। महिला ने बताया कि अगले दिन पांच जनवरी 2010 को बंडा थाना क्षेत्र के गांव मानपुर पिपरिया में एक खेत में उसकी पुत्री की लाश मिली।
बेटी की मौत के लगभग पांच साल बाद लड़की की मां ने रोजा थाना क्षेत्र के गांव बरतारा स्थित विनोबा सेवा आश्रम के रमेश भइया, इनकी पत्नी विमला सक्सेना, पुत्र मोहित सक्सेना के अलावा तीन अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया है। पत्र में इनके विरुद्ध कई गंभीर आरोप लगाए गए है।
यहां बता दें कि सीजेएम शैलेंद्र पांडेय ने इस मामले को दर्ज कर 27 मार्च को सुनवाई के आदेश दिए गए हैं। उसी दिन कोर्ट यह तय करेगी कि मामले में रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए निर्देश दिए जाएं या नहीं।
आश्रम में कोई आवासीय स्कूल नहीं चल रहा है। यह लड़की गरीब थी। उसकी सहायता के लिए शिक्षा दी जा रही थी। लड़की अपने घर आया-जाया करती थी। घर जाते समय उसके साथ ऐसी दुर्घटना हुई है। इसमें वे निर्दोष हैं। किसी के बहकावे में आकर लड़की की मां ने प्रार्थना पत्र दिया होगा। हम ऐसी 21 सौ गरीब छात्राओं को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
- रमेश भइया, संस्थापक विनोबा सेवा आश्रम बरतारा