होली के दिन भतीजे ने चाचा की ईंट से कूंच कर हत्या कर दी। घटना जमीन की रंजिश में अंजाम दी गई। मृतक के चचेरे भाई ने तीन लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है, लेकिन पुलिस दो लोगों की नामजदगी को फर्जी बता रही है। वारदात को अंजाम देने के बाद भतीजे ने कोतवाली पहुंचकर खुद को पुलिस के हवाले कर दिया।
गांव भरतापुर निवासी 45 वर्षीय बालकराम की शादी नहीं हुई थी। वह घर में अकेले रहते थे। उनका भाई तुलाराम पंजाब में मजदूरी करता है। होली से एक दिन पहले बालकराम अपनी बहन राधा को ससुराल गांव बरगदिया से बुलाकर घर लाए थे। बालकराम की 10 बीघा जमीन पर उनके भतीजे जगदीश की नजर थी। इसे लेकर वह बालकराम से खुन्नस मानता था।
रविवार शाम जगदीश बालकराम को घर से बुला ले गया। बालकराम ने जगदीश को शराब के लिए रुपये भी दिए। इसके बाद में देर रात तक दोनों साथ रहे। सोमवार सुबह लगभग चार बजे होलिका दहन स्थल के पास जगदीश ने बालकराम को गिरा दिया और सिर पर ईंट से प्रहार करना शुरू कर दिया। इससे बालकराम की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पाकर पुलिस गांव पहुंची लेकिन इससे पहले ही जगदीश कोतवाली पहुंच गया और बालकराम की हत्या करने की बात कबूलकर खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। बालकराम के चचेरे भाई चिरौंजीलाल ने जगदीश, मदनलाल और पंचम के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। मंगलवार को जगदीश को जेल भेज दिया गया। कोतवाली प्रभारी अशोक पाल सिंह का कहना है कि दो लोगों को झूठा नामजद कराया गया है। हत्या अकेले जगदीश ने ही की है।
‘मेरे हाथों लिखी थी बालकराम की मौत’
पुवायां। जगदीश ने चाचा बालकराम को मारने की योजना होली की पूर्व संध्या पर ही बना ली थी। वह चाहता था कि बालकराम अपनी जमीन उसके नाम कर दें, लेकिन बालकराम इसके लिए तैयार नहीं थे। जगदीश ने बालकराम से कई बार जमीन अपने नाम करने को कहा, लेकिन बालकराम ने जीवित रहते जमीन किसी को न देने की बात कही।
जगदीश ने होली की पूर्व संध्या पर बालकराम को रास्ते से हटाने की योजना बना ली थी। योजना के तहत रविवार शाम को ही वह बालकराम को घर से बुला लाया और बातों में फंसाकर रातभर अपने साथ घुमाता रहा। सोमवार तड़के जगदीश ने योजना को अंजाम देते हुए बालकराम की हत्या कर दी। जगदीश ने पुलिस को बताया कि उसने बालकराम को अकेले ही मारा है। हत्या के बाद गांव के लोगों ने पुलिस को फोन किया, लेकिन पुलिस के गांव पहुंचने से पहले ही जगदीश खुद ही कोतवाली पहुंच गया।
जगदीश के चेहरे पर चाचा की हत्या करने का कोई पछतावा नहीं था। हत्या करने की वजह पूछने पर जगदीश ने पुलिस से कहा कि भगवान ने बालकराम की मौत उसके हाथों लिखी थी, इसलिए मार डाला।