थाना कांट क्षेत्र के गांव दिलावरपुर में मंगलवार की शाम फसल नष्ट होने के सदमे में 63 वर्षीय सियाराम राठौर ने जान दे दी। सियाराम ने खेती से क्राप लोन और सूदखोरों से कर्जा भी लिया था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फसल के सदमे में हुई जिले में यह 15वीं मौत है।
गांव दिलावरपुर निवासी सियाराम राठौर के पास आठ बीघा जमीन थी। उन्होेंने गांव के बलवीर मास्टर की चार बीघा जमीन भी पटके पर ली थी। फसल के लिए उन्होंने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कांट से 60 हजार रुपये का लोन और सूदखारों से 20 हजार रुपये का कर्जा लिया था। बारिश के बाद के बाद हुई फसल की बर्बादी से सियाराम परेशान रहने लगे थे। मंगलवार को सियाराम के खेत में गेहूं की कटाई हो रही थी। गेहूं कटाई के समय कुछ बालियों को सियाराम ने अपने हाथ में मसला तो उसमें गेहूं के एक-दो दाने ही निकले। इससे परेशान होकर सियाराम घर चले आए। सियाराम घर में बैठकर रोने लगे। पत्नी नन्हीं देवी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया तो वह झगड़ने लगे। शाम करीब सात बजे सियाराम ने घर में रखा कीटनाशक पी लिया। हालत बिगड़ने पर परिवार वालों को सियाराम के कीटनाशक पीने का पता चला। परिवार वाले सियाराम को जिला अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, तब तक किसान ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
सात मई को होनी थी सियाराम के बेटे की शादी
कांट। सियाराम ने अपने तीसरे नंबर के बेटे कृष्णपाल की शादी हरदोई के गांव पारा में तय की थी। सात मई को बारात जानी थी। सियाराम ने सोचा था कि गेेहूं की फसल से बहू के जेवर-कपड़े का इंतजाम हो जाएगा, लेकिन बारिश ने सियाराम के अरमानों पर पानी फेर दिया। इस सदमे को सियाराम बर्दाश्त नहीं कर पाए और जहर खाकर जान दे दी।
परिवार वालों के मुताबिक पिछले साल सियाराम ने बड़ी बेटी राधा की शादी खुदागंज क्षेत्र के गांव मझिला निवासी सेवाराम से की थी। बेटी की शादी के दौरान भी उन्होंने कर्ज लिया था। इसमें से कुछ कर्ज चुकाना बाकी था। इसके साथ ही कृष्णपाल की शादी की भी तैयारी करनी थी। आंधी-बारिश से फसल बर्बाद होने के बाद से ही सियाराम परेशान रहने लगे थे। छोटी-छोटी बातों पर परिवार वालों से उलझ जाते थे। बैंक और सूदखोरों का कर्ज सियाराम के लिए चिंता का विषय बन गया था। समय रहते कर्ज वापस नहीं करने पर देनदारी बढ़ने और जलालत का भी डर था।
सियाराम के परिवार में मचा कोहराम
सियाराम की मौत से घर में कोहराम मच गया। पत्नी नन्ही देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। सियाराम के चार बेटे ओेमपाल, श्यामपाल, कृष्णपाल, धर्मेंद्र, बेटी राधा और रागिनी हैं। आठ बीघा जमीन में परिवार का गुजारा नहीं हो पाता था। सो उन्होंने चार बीघा जमीन पटके पर ले ली थी। फसल की बर्बादी से सियाराम को गहरा सदमा पहुंचा था। एक तो परिवार के भरण-पोषण दूसरे बेटे की शादी को लेकर वह बेहद परेशान थे। फसल कटी तो लागत भी हाथ नहीं आई। इससे उन्हें धक्का लगा। परिवार के लोगों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह परिवार के लोगों की बात समझने की स्थिति में नहीं रह गए। सियराम की मौत से परिवार में कोहराम मच गया।
खेत से घर लौटने के बाद नहीं खाया खाना
मंगलवार की शाम सियाराम जब खेत से घर लौटे तो पत्नी नन्ही देवी ने खाना परोसा लेकिन सियाराम ने खाना खाने से इनकार कर दिया। पत्नी के ज्यादा दबाव डालने पर सियाराम ने उन्हें डांट दिया। इसके बाद सियाराम घर में बनी झोपड़ी में लेट गए। रात में किसी समय उन्होंने कीटनाशक दवाई पी ली। सियाराम की मौत से गांव में सन्नाटा पसर गया। ग्रामीणों के मुताबिक सियाराम बहुत मिलनसार व्यक्ति थे। उनका कभी किसी से विवाद नहीं हुआ।