शहीदों की नगरी में पंडित रामप्रसाद बिस्मिल का घर राष्ट्रीय स्मारक घोषित कराने के लिए क्रांतिकारियों के वंशजों ने शनिवार को हुंकार भरी। वंशजों ने अमर शहीद पूर्वजों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करके प्रदर्शन भी किया। उन लोगों ने ज्ञापन में दी गई मांगों को पूरा करने के लिए 22 अक्तूबर तक का समय दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि तय समय में ऐसा नहीं हुआ तो हजारों युवाओं के साथ आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे।
अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के घर को स्मारक घोषित कराने के लिए शहीद क्रांतिकारियों के वंशज शहर के बाबा विश्वनाथ मंदिर में इकट्ठे हुए। क्रांतिकारियों के वंशजों ने बिस्मिल जी के मकान को स्मारक घोषित कराने सहित विभिन्न मांगों को पूरा कराने का संकल्प लेकर टाउनहाल स्थित शहीद प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।
भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं के साथ क्रांतिकारियों के वंशज वहां से जुलूस की शक्ल में देशभक्ति से प्रेरित नारों को लगाते हुए कलक्ट्रेट में पहुंचे। वहां पर भी प्रदर्शन किया। साथ ही प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया और उनकी मांगे पूरी किए जाने की मांग की।
इस दौरान क्रांतिकारी वंशजों के साथ भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के प्रदेश अध्यक्ष अशित पाठक, आशुतोष शुक्ला, आशीष शुक्ला, आलोक, आनंद पांडेय, सुभाष त्रिवेदी, परशुराम, मनोज, अक्षम अवस्थी, उमेश, रानू शर्मा आदि शामिल रहे।
वंशजों ने सुनाईं क्रांतिकारियों की वीरगाथा
अमर शहीद क्रांतिकारियों के वंशजों ने अपने पूर्वजों की वीरगाथा के बारे में लोगों को बताया। इस मौके पर अमर शहीद बिस्मिल परिवार से विजेंद्र पाल सिंह तोमर, तात्या टोपे के सुभाष टोपे, चंद्रशेखकर आजाद के भतीजे सुजीत आजाद, वीरांगना अवंतीबाई की वंशज राजकुमारी कुमस मेहदिल, आजाद हिंद फौज के नायक फूलसिंह के बेटे डीपी राघव, दुर्गा सिंह गहलौत के वंशज विजय सिसौदिया, भगत सिंह आजाद के साथ काला पानी की सजा पाने वाले महावीर सिंह के प्रपौत्र असीम राठौड़, अशफाक उल्ला खां के वंशज अशफाक उल्ला खां आदि ने विचार व्यक्त किए।
क्रांतिकारियों के वंशजों ने रखी ये मांगे
बिस्मिल का घर कब्जा मुक्त कराकर राष्ट्रीय शहीद स्मारक घोषित कराया जाए।
शहीद ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खां की स्मृतियों को सहेज कर रखा जाए।
भगत सिंह आजाद की प्रतिमा निगोही के हमजापुर चौराहा पर स्थापित कराया जाए।
शहीदों की इस नगरी को पर्यटन स्थल घोषित कराया जाए, जिससे बाहर के लोगों को शहीदों के बारे में जानकारी हो सके।
निगोही में शहीदों की प्रतिमा स्थापित करने वालों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।