कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (बॉ) की छात्राएं स्कूल की वार्डन से बेहद आहत हैं। आए दिन होने वाली मारपीट से आहत छात्राओं के अभिभावकों ने वार्डन के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए थाने पर तहरीर दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस ढाईघाट मेला में जा रही महिला कांस्टेबिल को छात्राओं ने आपबीती बताई।
बॉ स्कूल की वार्डन आकांक्षा गुप्ता का विवादों से गहरा नाता है। वार्डन द्वारा छात्राओं की मामूली गलतियों पर मारपीट करना आमबात है। वार्डन की प्रताड़ना से आहत छात्राएं शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक अफसरों तक से शिकायतें करती रहती हैं, लेकिन न तो वार्डन के विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई और न ही वे अपनी आदतों से बाज आ रहीं हैं।
पिछले दिनों वार्डन ने अल्पसंख्यक छात्राओं को अलग बैठाकर खाना देने और विरोध करने पर मारपीट करने की शिकायतें हुई थीं। विभागीय अफसरों ने जांच के नाम पर लीपापोती कर मामला रफादफा कर दिया था। छात्राओं को खाने में सड़ी हुई सब्जी देने का मामला भी अखबारों की सुर्खियां बना था, लेकिन मामला ले देकर रफादफा कर दिया गया।
सोमवार को शाम करीब चार बजे कक्षा छह की छात्रा काजल, निकेता शर्मा, सविता, शिवानी शर्मा, माधुरी, शिवानी सिंह, प्रिया आदि के साथ एकबार फिर वार्डन आकांक्षा गुप्ता ने मारपीट की। आरोप है कि घटिया खाना देने की शिकायत पर वार्डन ने पढ़ाई न करने का आरोप लगाते हुए उक्त छात्राओं की पिटाई की। मारपीट से आहत छात्राएं रोती हुर्इं अपने घर गईं और अपने अभिभावक गांव पहरूआ निवासी विनोद कुमार और कमलेश के साथ स्कूल आईं। आरोप है कि वार्डन से शिकायत करने पर अभिभावकों के साथ भी अभद्रता की गई। इससे आहत छात्राएं और अभिभावक थाने गए और वार्डन के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवाने को तहरीर दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
स्कूल में छमाही परीक्षाएं चल रही हैं। कक्षा छह की छात्रा काजल और माधुरी परीक्षा छोड़कर पानी पीने के बहाने घर चली गई थीं। इससे उन्हें डांटा फटकारा गया था। डांट से पहरूआ गांव की छात्राएं गोलबंदी करके झूठा आरोप लगा रहीं हैं।
- आकांक्षा गुप्ता वार्डन, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, मिर्जापुर
कस्तूरबा स्कूल की छात्राओं के अभिभावकों की ओर से तहरीर मिली है। जांच एसआई कल्यान सिंह को सौंपी गई है। सोमवार को रात हो जाने के कारण स्कूल में महिला शिक्षकों से पूछताछ नहीं की गई है। बाद जांच आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- प्रभुकांत, एसओ मिर्जापुर