दहेज के लिए पत्नी को मौत के घाट उतारने वाले युवक को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम उमेश कुमार शर्मा ने बुधवार को 10 साल सश्रम कारावास और सात हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की जमा होने वाली धनराशि की आधी रकम मृतका के विधिक प्रतिनिधियों को देने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी सास नंदरानी की मौत हो गई, जबकि न्यायाधीश सभी पक्षों को सुनने एवं सबूतों को परखने के बाद आरोपी जेठ रामू और दो जेठानियों सोनिका उर्फ वीरान एवं नन्हीं देवी को बरी कर दिया।
घटना दो मई 2012 की आधी रात को पुवायां तहसील क्षेत्र के गांव बनगवां में हुई थी। मृतका दिव्या उर्फ बबली के पिता नत्थू लाल ने घटना के संबंध में अगले दिन सुबह पुवायां थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अपनी तहरीर में उन्होंने घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए लिखा था कि साल भर से से उनकी बेटी को ससुराल में दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी कारण वह पति का घर छोड़कर मायके में आकर रहने लगी थी। तब दहेज की मांग के मुताबिक महंगा कलर टीवी खरीदकर दामाद को दिया, लेकिन मोटरसाइकिल नहीं दे पाए थे। घटना से कुछ दिन पहले परिचितों ने दोनों पक्षों के बीच पंचायती समझौता कराया और तब दिव्या पति के साथ ससुराल विदा हो गई। दो मई 2012 की रात दामाद के पड़ोसी से उन्हें मोबाइल पर सूचना मिली कि ससुरालियों ने पिटाई कर दिव्या की हत्या कर दी है। तुरंत वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचे तो इनकी बेटी कमरे में बेड पर मरी पड़ी मिली। उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे और खून रिस रहा था।
प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने पति दीपू समेत समेत पांचों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। मौके से सभी जरूरी तथ्य और प्रमाण भी पुलिस ने जुटाए। चार्जशीट दायर होने के बाद सभी पक्षों को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम ने सुना और सभी छह गवाहों को बयान सुने एवं पेश सबूतों को परखा। सरकारी वकील अमित सिंह वर्मा ने मृतका की ओर से पैरवी की। बुधवार दोपहर अपर सत्र न्यायाधीश ने केस की सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुना दिया।