यह थी योजना
तीनों किशोरियां सहेली हैं। इनकी उम्र 13 से 15 के बीच है। आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार की इन लड़कियों से गोपी के मार्फत धरमू इनसे कुछ माह पहले मिला। बीच-बीच में गांव आने पर वह इन तीनों के लिए कपड़े और गिफ्ट के साथ कभी कभी रुपये भी दे जाता था। इससे तीनों किशोरियां उसके झांसे में आ गईं। उसने तीनों को दिल्ली में अच्छी फर्म में 10-20 हजार रुपये महीने की नौकरी एवं मुफ्त रहने-खाने की सुविधा दिलाने का प्रस्ताव रखा तो वे मान गईं और उसके साथ दिल्ली भाग जाना तय किया। योजना का मास्टरमाइंड बताए जा रहे गोपी ने अपने पर शक न होने देने की तरकीब निकाली। तय किया कि धरमू इन तीनों को ले जाकर दिल्ली में तय ठिकाने पर टिका दे और तीन दिनों में गांव लौट आए। यहां फिर दोनों साथ ही घूमेंगे तो किसी को शक नहीं होगा और 10 दिन बाद दिल्ली जाकर किशोरियों के खरीददारों को बुलाकर अच्छे रेट पर एक-एक कर तीनों को बेच देंगे। लेकिन गांव में पुलिस और परिवारजनों के सक्रिय होने पर गोपी ने धरमू को मोबाइल पर सचेत किया कि पुलिस सक्रिय हो गई है और दिल्ली पहुंचते ही गिरफ्तार कर सकती है। फिर गोपी ने सलाह दी कि बरेली या मुरादाबाद तक जाने की बजाय पहले ही किसी छोटे स्टेशन पर उतरकर गाड़ी बदल ले। उसने ही यह सुझाया कि एक्सप्रेस की बजाय पैसेंजर ट्रेन से सफर करें क्योंकि पुलिस आमतौर पर उन ट्रेनों को चेक ही नहीं करती।