कलान के छिदकुरी गांव में फर्जी यूनिट बनाकर कोटे की दूसरी दुकान खुलवाने पर निलंबित हुए सप्लाई ऑफिस के तीनों ‘खिलाड़ियों’ ने रविवार को नया कारनामा कर दिखाया। उन्होंने आपूर्ति कार्यालय से भेजे गए निलंबन आदेश पढ़े, लेकिन उन्हें रिसीव करने के बजाय वाहकों को लौटा दिए और अपना चार्ज भी नहीं सौंपा। विभाग ने तीनों कर्मचारियों को फरार मानते हुए मामले की रिपोर्ट डीएम को सौंपने की तैयारी कर ली है।
इस प्रकरण में कई दौर की जांच के बाद निलंबित हुए तिलहर के पूर्ति निरीक्षक रामपाल, जलालाबाद के आपूर्ति लिपिक राजकुमार और सदर में तैनात अंकुर सक्सेना को नियमानुसार सक्षम अधिकारियों के सामने उपस्थित होकर अपना कार्यभार सौंपना था, लेकिन इतना सब होने के बावजूद उन्होंने उल्टा पैंतरा अपनाया। रामपाल ने सप्लाई इंस्पेक्टर का चार्ज लेने तिलहर भेजे गए आपूर्ति लिपिक प्रदीप कुमार से निलंबन आदेश लेकर पढ़ा, लेकिन उसे रिसीव करने से मना कर दिया।
यही हरकत जलालाबाद में चार्ज लेने गए सप्लाई इंस्पेक्टर आरपी सिंह के साथ आपूर्ति लिपिक राजकुमार ने और मुख्यालय के सप्लाई बाबू पवन यादव के साथ अंकुर सक्सेना ने की। दोनों ने सस्पेंशन आर्डर पढ़ने के बाद वापस कर दिए और दोनों वाहकों को कार्यभार भी नहीं सौंपा। चूंकि, तीनों निलंबित कर्मचारियों ने अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखने की जरूरत भी नहीं समझी, इसलिए विभाग ने उन्हें फरार मान लिया है।
डीएसओ बीके शुक्ला के अनुसार ‘फरार’ हुए तीनों निलंबित कर्मचारियों के असहयोगपूर्ण रवैये की रिपोर्ट सोमवार को डीएम के समक्ष प्रस्तुत करके अग्रिम दिशा-निर्देश हासिल किए जाएंगे और उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई होगी।
आपराधिक करतूतों में भी लिप्त रहे हैं ‘खिलाड़ी’
डीएसओ ने बताया कि आपूर्ति लिपिक राजकुमार पुवायां में तैनाती के दौरान रेप के मामले में जेल जाने पर पहले भी निलंबित हो चुके हैं। उनकी व्यक्तिगत पत्रावली पर यह आख्या दर्ज होने के बाद राजकुमार ने फाइल अपने पास दबा ली। इस कृत्य पर तत्कालीन डीएम अपर्णा यू ने लिपिक को प्रतिकूल प्रविष्टि दी थी। उधर, अंकुर सक्सेना एक अन्य विभागीय कर्मचारी के साथ गत 12 जनवरी को राज्यरानी एक्सप्रेस में बरेली से यहां आते वक्त मजिस्ट्रेट चेकिंग में बेटिकट पकड़े जा चुके हैं। मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त अंकुर को टाइपिंग नहीं आने पर लिपिक के बजाय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनाने की प्रक्रिया शुरू होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। डीएसओ के अनुसार एक अन्य विभागीय कर्मचारी को टैंकर से तेल बेचते पकड़े जाने पर उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई, लेकिन आचरण सुधारने के बजाय विभाग के ही एक कर्मचारी पर जानलेवा हमले में धारा 307 का मुकदमा झेल रहा है।