मिर्जापुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में गत 26 दिसंबर की देर शाम छात्राओं की बेरहमी से पिटाई के मामले में बुधवार को जिला प्रशासन के स्तर पर कड़ी कार्रवाई की गई। वार्डन आकांक्षा गुप्ता की संविदा सक्षम स्तर के अनुमोदन के बाद बीएसए राकेश कुमार ने इस प्रतिबंध के साथ समाप्त कर दी कि पुन: वह सेवा में नहीं ली जाएंगी। गत 27 दिसंबर के अंक में अमर उजाला ने ही इस प्रकरण को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
उक्त बा स्कूल में कार्यरत स्टाफ और छात्राओं से मिली शिकायतों पर जिला प्रशासनिक स्तर पर तीन अलग-अलग टीमों से जांच कराई गई थी। पहली टीम बालिका शिक्षा के जिला समन्वयक, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी और एसएसए की संयुक्त जांच समिति वाली थी। दूसरी बालिका शिक्षा के जिला समन्वयक और तीसरी एसडीएम जलालाबाद वंदना त्रिवेदी की टीम थी। तीनों ही टीमों की जांच आख्याओं में शिकायती पत्रों में लगे आरोपों की पुष्टि की गई थी। उसी क्रम में वार्डन को 29 दिसंबर को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था और उनका पक्ष जानने के बाद कार्रवाई तय हुई।
बता दें कि बीते 26 दिसंबर शनिवार की शाम करीब सात बजे कस्तूरबा स्कूल की कक्षा छह की छात्राएं संध्या, काजल, उजाला, सुहावनी, शिल्पी, रूबी, आनम, मधू, रोशनी, शीतल, रीना, नीरज, चंचल आदि अपने अभिभावकों के साथ रोती बिलखती थाने पहुंचीं। छात्राओं ने बताया कि ये पढ़ाई कर रही थीं, उसी समय दूसरी छात्राएं ढोलक बजाने लगीं। ढोलक बजाने से मना करने पर छात्राएं आपस में मारपीट करने लगीं। उस पर वार्डन ने एक दर्जन के करीब छात्राओं की जमकर पिटाई कर दी। छात्राओं ने आरोप लगाया था कि वार्डन के साथ ही एक छात्रा की मां ने स्कूल में आकर पीटाई की थी। थाने से एसआई अशोक कुमार पाल छात्राओं की व्यथा सुनकर तुरंत स्कूल पहुंचे और स्कूल में हंगामा कर रहे अभिभावकों और छात्राओं को समझा बुझाकर किसी तरह मामला शांत किया था।