कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मिर्जापुर से विभिन्न आरोपों में जिस वार्डन की संविदा समाप्त की जा चुकी है वह बृहस्पतिवार को आठ-दस छात्राओं को लेकर कलक्ट्रेट पहुंच गई। यहां बच्चों से नारेबाजी कराकर वह अपना पक्ष डीएम के समक्ष रखना चाहती थीं। जब अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तो बर्खास्त वार्डन बच्चों को छोड़कर वहां से खिसक ली।
सिटी मजिस्ट्रेट नरेंद्र सिंह ने जानना चाहा कि जब वार्डन आकांक्षा गुप्ता की संविदा ही समाप्त हो चुकी है तो उसके साथ बच्चे कहां से आ गए और अभिभावकों को इन बच्चों के जिला मुख्यालय आने की जानकारी है भी कि नहीं। बता दें कि कस्तूरबा गांधी विद्यालय में बच्चों और स्टाफ की आवासीय व्यवस्था होती है, फिर बच्चे स्कूल से बाहर इतनी दूर कैसे आ गए। बर्खास्त वार्डन की ओर से डीएम को ज्ञापन भेजा गया है, जिसमें उसने स्वयं को निर्दोष बताते हुए डीएम से स्वयं जांच कराकर न्याय की गुहार की है।
इस संबंध में बीएसए राकेश कुमार का कहना है कि वह लखनऊ में हैं, उन्हें सूचना मिली थी। वह शुक्रवार को संबंधित स्कूल जाकर अभिभावकों से बात करेंगे और यदि अभिभावकों ने जबरदस्ती बच्चों को मुख्यालय भेजा है तो उन बच्चों को स्कूल से पृथक करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। यह घोर अनुशासनहीनता है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।