प्रसव के दौरान नवजात का गला भीतर फंसे रह जाने पर गला काटकर धड़ बाहर निकालने से पहले नवजात और बाद में प्रसूता की हुई मौत के मामले पर प्रदेश सरकार ने सोमवार को गंभीर संज्ञान लिया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना को फोन कर प्रकरण में अब तक की कार्रवाई की जानकारी ली और न्यायोचित कार्रवाई करने को कहा। डीएम ने बताया कि आरोपी जिला महिला अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक समेत प्रकरण में लिप्त बताए जा रहे सभी स्टाफ के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी जा चुकी है। साथ ही प्रकरण की जांच शासन स्तर पर कराने की संस्तुति भेजी है। इसी क्रम में मंगलवार को स्वास्थ्य महकमे की निदेशक डॉ. आशा पांडेय यहां पहुंच रही हैं। सोमवार को अस्पताल में देर शाम तक अपर स्वास्थ्य निदेशक (बरेली मंडल) डॉ. अनिता दत्ता ने आरोपों के दायरे में आए सभी स्टाफ से अलग - अलग बयान लिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित पक्ष का बयान लेने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
शहर के मोहल्ला दिलाजाक निवासी हेमंत की पत्नी गीता को प्रसव पीड़ा होने पर घरवालों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हेमंत द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को प्रसव से पहले पत्नी गीता को नार्मल डिलीवरी के लिए बाध्य किया गया। गर्भ में बच्चा उल्टा होने की दशा में भी आपरेशन के बजाय नार्मल डिलीवरी के प्रयास में बच्चे का धड़ तो बाहर निकल आया लेकिन गर्दन फंसी रह गई। तब आपरेशन कर नवजात का गला काट दिया और धड़ को अलग कर बाहर निकाल लिया। ऐसे में नवजात की तत्काल मौत हो गई और प्रसूता की भी हालत बिगड़ी तो सीएमएस डॉ. अश्विनी कुमार और सर्जन डॉ. ज्योति ने गीता को प्राइवेट अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जहां बच्चेदानी में रह गया नवजात का सिर बाहर निकाला गया और रविवार तड़के गीता की मौत हो गई। इस पर गंभीर संज्ञान लेते हुए डीएम ने एडीएम प्रशासयन और प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट से मामले की जांच कराई। उनकी आख्या के आधार पर महिला अस्पताल के सीएमएस, सर्जन और प्रसव कराने वाली नर्सों को निलंबित किए जाने संस्तुति शासन को भेजी गई है। सोमवार को जिला महिला अस्पताल में अपर स्वास्थ्य निदेशक ने जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ.अश्वनी कुमार, सर्जन डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, डॉ. अनीता, डॉ. विजय सिंह और अन्य स्टाफ के बयान लिए।