चार दिन पहले रोडवेज के बस कंडक्टर के साथ हुई लूट के मामले में पुलिस की कुभंकर्णी नींद नही खुली है। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए बस कंडक्टर रोजा और आरसी मिशन थाने के बीच फुटबाल बना हुआ है। थकहार कर पीड़ित ने एसपी से मिलने का प्रयास किया, लेकिन मीटिंग में व्यस्त होने के कारण उसकी फरियाद नहीं सुनी जा सकी।
बता दें कि 19 दिसंबर की रात करीब साढ़े नौ बजे फैजाबाद डिपो की बस जो साबितपुर से दिल्ली जा रही थी। यात्रियो की नित्य क्रिया के लिए हाइवे स्थित बाबा ढाबे के पास रोकी गई थी। इसी बीच चार बदमाशों ने कंडक्टर माखनलाल यादव की कनपटी पर तमंचा लगाकर 47 हलार की नगदी सहित बैग को लूट लिया था।
पीड़ित माखन लाल ने रात में ही सौ नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन मामला क्षेत्राधिकार विवाद में उलझ गया था। कंडक्टर यादव का आरोप है कि बाद में रोजा पुलिस ने बैग गिरने की गुमशुदगी जबरन लिखवा ली थी। इस मामले में बस कंडक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू होने के आसार हैं।
बुधवार को बस कंडक्टर माखन लाल पहले थाना रोजा गया, जहां उसे आरसी मिशन थाने टरका दिया गया यही हाल यहां की पुलिस ने किया। थकहार कर पीड़ित ने एसपी बबलू कुमार के दरबार में दस्तक देने का प्रयास किया, लेकिन साहब के मीटिंग में व्यस्त होने के कारण वह जनता की फरियाद नहीं सुन सके।
मेरे साथ लूट की घटना हुई है। रोजा पुलिस ने जबरन डरा धमका कर गुमशुदगी की तहरीर ली। लूटे गए रुपये सरकार की संपत्ति है, जिसकी रिपोर्ट लिखाने का हरसंभव प्रयास करूंगा। एसपी को भी घटना से अवगत करा रहा हॅू।
- माखन लाल यादव, पीड़ित बस कंडक्टर
बस परिचालक ने रोजा थाने में बैग गुम होने की सूचना दी थी, जिसको दर्ज किया गया है। लूट के बारे में जांच कर आगे की कार्रवाई हो रही है।
- अनुराग दर्शन, सीओ सदर
यात्रियों के लिए अब ढाबे भी सुरक्षित नहीं
हाईवे स्थित ढाबे अब यात्रियों के लिये सुरक्षित नहीं हैं। 19 दिसंबर की घटना से साफ है कि मुरादाबाद से लेकर लखनऊ तक का सफर करने के लिए रोडवेज द्वारा कही भी जलपान या नित्य क्रिया के लिये सुरक्षित स्थान चयनित नही किया गया है। इससे बस चालक अपने स्वार्थवश ढाबों पर बसों को खड़ा करते हैं जहां यात्रियों के साथ घटनाएं होना आम बात हो गई है, लेकिन परदेशी होने के कारण ढाबा संचालक और पुलिस इन यात्रियों को डरा धमका कर भगा देते हैं। इस घटना में परिचालक ने जो बयां किया है उससे पुलिस का घिनौना चेहरा ही उजागर हुआ है। जो अपराध पर नियंत्रण करने के बजाय उसके अल्पीकरण पर ज्यादा ध्यान देते है।