शहर के नजदीक मोक्षधाम के सामने खन्नौत नदी के पुल पर लखनऊ को जाने वाली डाउन लाइन पर बुधवार सुबह करीब सवा नौ बजे दो महिलाएं, एक किशोरी और तीन बच्चों के कटे हुए शव मिले हैं। प्रथम दृष्टया इसका कारण ट्रेन से हुआ हादसा माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि हादसे के शिकार सभी लोग आसपास के किसी गांव में ईंट-भट्ठे पर काम करते होंगे लेकिन रात 10 बजे तक किसी भी शव की शिनाख्त न होने और कोई भी जानकारी न मिलने के कारण तरह-तरह की अटकलेें भी लगाई जा रही हैं। सभी शवों के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन्होंने मंगलवार रात खाना खाया था। सुबह किसी ने कुछ नहीं खाया था।
रेलवे, जिला प्रशासन और पुलिस का अनुमान है कि हादसे के समय बच्चे महिलाओं और किशोरी की गोद में रहे होंगे। बच्चों में आठ महीने की एक लड़की, तीन साल और पांच साल के दो लड़के शामिल हैं। मृतक दोनों महिलाओं में से एक की उम्र करीब 45 साल जबकि दूसरी की उम्र 35 साल है। किशोरी की उम्र करीब 15 वर्ष है।
हादसा किस ट्रेन से हुआ, इसके बारे में अब तक कुछ भी स्पष्ट नहीं हैं। हादसे की सूचना 9.38 बजे जननायक एक्सप्रेस ट्रेन के ड्राइवर आरडी प्रसाद वर्मा ने रोजा स्टेशन पर दी। वर्मा ने बताया कि उसने लाशें पुल पर पड़ी देखी हैं। बाद में वर्मा का सीतापुर रेलवे स्टेशन पर मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। अनुमान है कि हादसा इससे पहले गुजरी पंजाब मेल से हुआ होगा। कारण यह है कि पंजाब मेल में इलेक्ट्रिक इंजन लगा होता है, जिसकी आवाज डीजल इंजन से बहुत कम होती है। ऐसे में लोगों को ट्रेन आने का अहसास जल्दी नहीं होता है। यही नहीं, हादसे के समय नदी के आसपास घना कोहरा था, इसलिए हादसे का शिकार हुए लोगों को ट्रेन आते हुए दिखाई नहीं पड़ी होगी। पंजाब मेल के ड्राइवर ने हालांकि लखनऊ में 15 मिनट की पूछताछ में दुर्घटना से अनभिज्ञता जताई है।
डीएम शुभ्रा सक्सेना, एसपी राजेंद्र प्रसाद सिंह यादव, एडीएम एफआर पीके श्रीवास्तव, एएसपी सिटी एपी सिंह, एसडीएम सदर जयनाथ यादव समेत रेलवे के अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा किया। डीएम का कहना है कि मृतकों की शिनाख्त जल्दी कराने का प्रयास किया जा रहा है।
एक महिला के हाथ पर गुदा है पति का नाम
मृतकों में शामिल 45 वर्षीय महिला ने स्लेटी रंग की साड़ी (हरे रंग के फूल बने हुए) और काला ब्लाउज पहना था। इसके दाहिने हाथ पर निर्मल पत्नी विनोद बेटा गुदे हुए हैं। दूसरी महिला ने फिरोजी रंग की साड़ी और नारंगी रंग का लाल पट्टी वाला स्वेटर पहना था। किशोरी ने लाल और हरे रंग के फूलों वाला बैगनी रंग का कुर्ता और मटमैली रंग की सलवार पहनी थी।
किस ट्रेन से हुआ हादसा कहीं राज न रह जाए
शाहजहांपुर। छह मौतों की बड़ी घटना होने के बाद सबसे पहले तो यह जानने की कोशिश की गई कि ये छह लोग हैं कौन? दूसरा पता लगाना था कि आखिर किस ट्रेन से हादसा हुआ। पहले-पहल तो किसान एक्सप्रेस से घटना होने की बात उड़ी, मगर यह तो घटना के करीब एक घंटे बाद खन्नौत नदी से गुजरी थी। काफी खोजबीन के बाद कयास लगाया गया कि पंजाब मेल से यह हादसा हुआ है, क्योंकि इसके पीछे-पीछे गई जननायक के ड्राइवर आरडी प्रसाद वर्मा ने लाशें पहले से पड़े होने की बात कही है।
पंजाब मेल के ड्राइवर महेंद्र राणा ने लखनऊ में 15 मिनट हुई पूछताछ में साफ मना कर दिया कि उसे इस हादसे के बारे में कुछ नहीं मालूम। सवाल यह भी उठता है कि यदि पंजाब मेल से पहले किसी ट्रेन से यह घटना हुई तो पंजाब मेल के ड्राइवर ने सूचना क्यों नहीं दी। हालांकि एक स्थिति यह हो सकती है कि पुल से दस मीटर पहले लगे सिग्नल को ग्रीन देखने के बाद आगे कुछ देखने की कोशिश न की गई हो या दूसरे किसी काम में ध्यान बंट गया हो। कुल मिलाकर स्थिति यह बन रही है कि यह तय करना मुश्किल है कि आखिर किस ट्रेन से यह हादसा हुआ। रेलवे के अधिकारी भी अधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
‘कपड़े और बोरे जैसी चीज देखी पहले मैंने’
रोजा। मैं शाहजहांपुर स्टेशन से सुबह 9.23 बजे रवाना हुआ था। पांच मिनट बाद ही खन्नौत नदी के पुल के पास पहुंचने पर कोहरे की धुंध दिखाई दी। इंजन की हेड लाइट से ज्यादा दूर का दिखाई नहीं पड़ रहा था। जब पुल पर गाड़ी पहुंची तब ट्रैक के बीच कपड़े और बोरे जैसी कोई चीज दिखाई पड़ी। खिड़की खोलकर साइड से देखा तो शव के टुकड़े और जगह-जगह खून नजर आया। ट्रेन रोके बगैर वॉकी-टॉकी से रोजा के स्टेशन मास्टर को यह बात बताई। चूंकि रोजा स्टेशन पर मेरी गाड़ी का ठहराव नहीं था, इसलिए मैंने लिखित कोई सूचना नहीं दी। मेरा अनुमान है कि मेरी गाड़ी से पहले वाली ट्रेन से यह हादसा हुआ।
-आरडी प्रसाद वर्मा, चालक, जननायक एक्सप्रेस (रोजा मुख्यालय पर तैनाती)
इलेक्ट्रिक इंजन से हादसे की आशंका ज्यादा
शाहजहांपुर। अब तक की पुलिस की छानबीन के बाद पूरा शक यही है कि हादसा पंजाब मेल से ही हुआ है। यह वह ट्रेन है जिसमें इंजन इलेक्ट्रिक लगाया जाता है। पंजाब रूट की ज्यादातर ट्रेनों में ये इंजन लगे हुए हैं। वहीं अब ये इंजन रेलवे पटरियों को गलत तरीके से पार करने वाले या फिर रेलवे पुल को अपना रास्ता बनाने वाले लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। दरअसल, एक तो इसके इंजन की आवाज काफी हल्की होती है, बल्कि हार्न की भी आवाज दबी रहती है। इस कारण ज्यादा दूर से इसके आने का अंदाज नहीं हो पाता।
दूसरा इलेक्ट्रिक इंजन का संचालन करने वाले चालक का एक हाथ पुश बटन पर लगातार रहना जरूरी होता है, वरना गाड़ी न्यूट्रल की स्थिति में आ जाती, जबकि डीजल इंजन में थ्राटल सिस्टम होता है, जो कार या बाइक के गेयर जैसा होता है। थ्राटल से जो स्पीड फिक्स कर दी जाती है, ट्रेन उसी रफ्तर में दौड़ती रहती है। यानी ड्राइवर कुछ मिनट के लिए अपनी सीट से भी हट सकता है। यही नहीं, वेक्यूम प्रेशर, वोल्टेज मीटर आदि पर भी लगातार ध्यान रखना होता है। बाकी असिस्टेंट ड्राइवर का जिम्मा सिग्नल पर ध्यान देना होता है। सो अतिरिक्त सावधानी बरतने का काम न तो ड्राइवर उतनी दिलचस्पी से कर पाता है और न ही असिस्टेंट ड्राइवर करता है।
आम रास्ता बनकर रह गया है खन्नौत नदी का पुल
रोजा। खन्नौत नदी का करीब 120 मीटर लंबा रेलवे पुल आम रास्ता बनकर रह गया है। पुल पार करीब एक दर्जन भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर बड़ी संख्या में मोक्षधाम के आसपास के गांव बिलरिया, तयूलक, मऊ बासक के हैं। वहीं लोधीपुर मोहल्ले के लोगों के खेत भी नदी पार उत्तर दिशा में हैं, सो वे शार्ट कट के रूप में इस पुल का इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि इस पुल पर ट्रेन से कटने या फिर टकराकर मरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। कूड़ा-कबाड़ बीनने वाले मजदूर भी इसी पुल को पार करके रेलवे लाइन के किनारे-किनारे घूमते देखे जा सकते हैं।
इस पुल के अलावा कई दूसरे स्थान भी खतरनाक साबित हुए हैं। मोहम्मदी रेलवे क्रॉसिंग का इस्तेमाल करने के बजाए लोग उससे करीब सौ मीटर पहले पटरियों को पार करके आने-जाने में ज्यादा सुविधा मानते हैं। कैलाश नगर कॉलोनी, वसुलिया तिराहा, कैंट रोड आने-जाने वालों की संख्या इसमें ज्यादा है। हथौड़ा फाटक की भी यही स्थिति है। वहां भी क्रॉसिंग का इस्तेमाल करने के बजाए लोगों का सौ मीटर पहले पटरियां पार करके हथौड़िया गांव से सटे ईंट भट्ठों पर आना-जाना बना रहता है। दूसरी तरफ पश्चिम दिशा में गर्रा पुल का इस्तेमाल लोग खन्नौत नदी के पुल की तरह ही करते हैं। वहां सुभाषनगर कॉलोनी, रेलवे कॉलोनी, शहबाजनगर के लोग अक्सर साइकिलों के साथ आते-जाते देखे जाते हैं। बस वहां इतना जरूर है कि लोग पुल से सटे पॉथ-वे का इस्तेमाल करते हैं। यह पॉथ वे हालांकि आम लोगों के लिए नहीं है। केवल रेलवे कर्मी सरकारी काम के दौरान ही इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
डीएम ने गलत तरीके से लाइन पार न करने की अपील की
शाहजहांपुर। मौके पर पहुंचीं डीएम शुभ्रा सक्सेना ने वहां मौजूद मीडिया कर्मियों के माध्यम से लोगों से अपील की है कि वे गलत तरीके से रेलवे लाइन पार न करें। न ही पुल का शार्टकट के रूप में इस्तेमाल करें।
याद आया लकड़ी वाले पुल का हादसा
शाहजहांपुर। खन्नौत नदी पर बुधवार को छह लोगों की ट्रेन से कटकर मौत होने के बाद शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन के पहले सिग्नल के पास लकड़ी वाले पुल पर दो फरवरी 2011 को हुए हादसे की यादें ताजा हो गईं। इस हादसे में हिमगिरी एक्सप्रेस की छत पर सवार 19 लोगों की इस पुल से टकराकर गिरने से मौत हो गई थी। ये 19 युवक बरेली में सेना भर्ती से लौट रहे थे।
एक साल पहले शाहजहांपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर आंझी शाहबाद स्टेशन के टर्निंग प्वाइंट पर रेलवे के जूनियर इंजीनियर और गैंगमैन की मौत हो गई थी। तीन महीने पहले मोहम्मदी क्रॉसिंग के समीप मां-बेटी की भी ट्रेन से टकराकर मौत हो गई थी। तीन दिन पहले अटसलिया फाटक पर एक अज्ञात युवक की मौत भी ट्रेन से टकराकर हो गई थी। जहानीखेड़ा में पिछले साल सात जून को मालगाड़ी से ट्रक टकराने की घटना हुई थी। चार महीने पहले मैगलगंज में मोटर साइकिल ट्रेन की चपेट में आने से बाइक चालक की मौत हो गई थी। छह महीने पहले जंग बहादुरगंज स्टेशन (हरदोई) के पास एक डीसीएम गाड़ी के ट्रेन से टकराने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। एक महीने पहले रोजा साइडिंग में शंटिंग के दौरान रेलवे लाइन पार करते वक्त ट्रेन से टकराकर रेलवे कर्मी की मौत हो गई थी।