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सजा सुनते ही सखियों का सिर झुक गया

Fri, 14 Aug 2015 11:10 PM IST
शाहजहांपुर।
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अपने समलैंगिक संबंधों में बाधक बने दो भाइयों का वर्ष 2007 में खुटार के सीतापुर गांव में हत्या कराने वाली दोनों सखियां शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने पर अपर सत्र न्यायालय में सिर झुकाए खड़ी रहीं। अपने पति और जेठ की हत्या की साजिश में शामिल रहीं कमला सिर पर पल्लू रखे हुए थी। बेटे और ससुर के अपने खिलाफ बयान पर हुई सजा सुनने के बाद उसके आंखों से आंसू छलके तो उसने पल्लू चेहरे पर ढक लिया। कभी सिर्फ मर्दाना पोशाक पहनकर निकलने के लिए सुर्खियों में रही शांति देवी भी पारंपरिक साड़ी वाले परिधान में सकुचाई सी दिखी। दोनों चुपचाप बाकी के तीनों अभियुक्तों के साथ जेल जाने को साथ में कोर्ट से बाहर निकले।
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मामले की वादी और पुलिस की ओर से पैरवी करने वाले सरकारी वकील संजय सिंह तोमर ने बताया कि कमला के ससुर प्यारे लाल और बेटे रजनीश ने कातिलों को छत पर आते, गोली दागते और फिर वापस भागते देखा था। इन्हीं दोनों के बयान अभियुक्तों की ओर से न्यूनतम सजा की अपील पर भारी पड़ा। सजायाफ्ता अभियुक्तों में से रामेश्वर की उम्र इस समय 60 वर्ष है। उसने एवं अभियुक्त गंगाराम और विशुन पाल ने खुद को गरीब बताते हुए इस अपराध को अपने जीवन का पहला कांड बताकर माफी मांगी थी। पुलिस ने विवेचना के दौरान दोनों सखियों से पूछताछ में पाया था कि ये तीनों ही अभियुक्त शांति देवी के संपर्क में थे। उसी ने इन्हें कमला के घर आकर रची गयी साजिश को अंजाम देने के लिए लालच देकर मनाया था।
प्रकरण की जांच के दौरान वर्ष 2007 में इन सखियों का किस्सा पुलिस के हवाले से सुर्खियों में रहा था। तब यह सामने आया था कि खुदागंज थाना क्षेत्र के गांव सिमौरा में रहने वाली शांति देवी पैंट-शर्ट में ही रहती थी। उसने तब फूलन देवी के अंदाज में सिर पर फट्टा बांधकर और कंधे पर बंदूक लटकाकर तस्वीर भी खिंचवाई थी। विवाहिता कमला के यहां इसका आना-जाना लोगों को खटकता था। अपने सखी के साथ ही कमरे में देर तक बंद रहने और सखी के लिए पति की उपेक्षा करने पर कमला को कई बार डांटा-फटकारा गया, लेकिन वह नहीं मानी। उल्टे उसने तब इनके संबंधों में बाधक बन रहे परिवार वालों को ही रास्ते से सदा के लिए हटाने की योजना बना डाली थी। हालांकि उस हमले में ससुर प्यारे लाल बच गए थे और उन्हीं की तहरीर पर केस दर्ज किया गया था।
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