जनहित के कार्यों में रुचि लेने और जनसमस्याओं का प्राथमिकता पर निस्तारण करने वाली एसडीएम वंदना त्रिवेदी का कम से कम एक साल तबादला न करने की मांग को लेकर सिविल बार से जुड़े अधिवक्ताओं ने तमाम अन्य लोगों के साथ राज्यपाल को संबोधित 11 सूत्रीय ज्ञापन नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र यादव को दिया।
ज्ञापन में कहा गया है कि मौजूदा समय कई क्षेत्रों में विभिन्न तरह की समस्याएं हैं। एसडीएम वंदना त्रिवेदी के यहां आने के बाद कई तरह की समस्याओं पर अंकुश लगा है और वह लगातार जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता पर कराने में रुचि लेती हैं। इससे आम जनता को काफी राहत है।
ज्ञापन में कहा गया है कि एसडीएम द्वारा बिना भेदभाव और दबाव के कार्य करने से दबंग तथा माफिया लोग परेशान हैं और वह उनका तबादला कराने को प्रयासरत है। ज्ञापन में आम जनता के हितों को देखते हुए कम से कम एक साल एसडीएम का तबादला न किए जाने की जोरदार मांग की गई है। ज्ञापन देने से पहले इन लोगों ने तबादला कराने के प्रयासों में लगे कथित माफियाओं के विरोध में प्रदर्शन कर विरोध जताया। ज्ञापन देने तथा प्रदर्शन करने वालों में अधिवक्ता रामचंद्र शाक्य, त्र्रामेंद्र विक्रम दीक्षित, भूपेंद्र प्रताप सिंह, विजय प्रताप सिंह के अलावा कई अन्य लोग भी शामिल रहे।
एसडीएम से वार्ता के बाद बार संघ का आंदोलन स्थगित
विभिन्न समस्याओं को लेकर एसडीएम द्वारा अधिवक्ताओं के शिष्टमंडल से वार्ता न करने का आरोप लगाते हुए बार एसोसिएशन द्वारा एसडीएम व तहसीलदार कोर्ट का अनिश्चित कालीन बहिष्कार करने का लिया गया निर्णय बुधवार को उनसे वार्ता के बाद रद्द हो गया। इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद चंद्र शर्मा ने बताया कि बुधवार को वकीलों का शिष्टमंडल एसडीएम वंदना त्रिवेदी ने उनके चैंबर में मिला और अपनी समस्याएं रखीं। शर्मा के अनुसार एसडीएम ने उक्त समस्याओं का निराकरण करा देने का आश्वासन दिया गया। उन्होंने बताया कि एसडीएम के आश्वासन के बाद बार एसोसिएशन ने कोर्ट बहिष्कार करने के अपने निर्णय को वापस ले लिया है।
बता दें कि बार एसोसिएशन की मंगलवार को हुई बैठक में एसडीएम द्वारा वार्ता के लिए समय न दिए जाने की बात कहते हुए उक्त दोनों अधिकारियों के न्यायालय का अनिश्चित काल के लिये बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया था।