करीब डेढ़ साल पहले जिस युवक को गायब कर उसकी हत्या कर दिए जाने का आरोप लगाकर पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के बाद जेल भिजवाया गया था, संदीप मिश्रा नाम के उस युवक के जिंदा होने की सूचना छह माह पहले ही मिल गई थी। उस समय उसने अल्हागंज स्थित अपने घर पर परिवारीजनों से मोबाइल पर बात की थी। उसे पता नहीं था कि डीएनए टेस्ट निगेटिव आने के बाद से उसके घरवालों का नंबर सर्विलांस पर है। काल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) के आधार पर पुलिस ने इसकी पुष्टि की और परिवारीजनों के सामने प्रमाण रखे तो उन्होंने संदीप को पुलिस सामने प्रस्तुत कराया। संदीप पुलिस की नजर में आने से बचने के लिए फर्रुखाबाद में अपनी रिश्तेदारी में छिपा हुआ था।
एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में चल रहे इस मुकदमे की सुनवाई के क्रम में पुलिस की ताजा रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तैयारी है। इसके बाद जमानत पर चल रहे पांचों निर्दोष आरोपियों पर दर्ज केस खारिज होगा। इसके लिए सीजेएम के समक्ष कलमबद्ध कराए गए संदीप के बयान को प्रस्तुत किया जाना है। पुलिस को मामले में कोर्ट में मिलने वाले निर्देशों का इंतजार है। उधर, शव का शिनाख्त करने संबंधी गलत हलफनामा देने वाले संदीप के भाई प्रदीप पर कानूनी शिकंजा कसने की संभावना है। प्रकरण की तफ्तीश कर रहे क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर एके सिंह ने बताया कि अब जांच इस पर केंद्रित है कि वह लाश किस युवक की थी जिसे तब संदीप बताते हुए परिवारवालों ने हलफनामा दिया था। इसके लिए क्षेत्र के पुराने ब्योरे खंगाले जा रहे हैं ताकि कोई क्लू मिल सके।
यह था मामला
प्रकरण वर्ष 2014 में रक्षाबंधन के अगले दिन शुरू हुआ। संदीप को मिर्जापुर के वानगांव में रहने वाली बुआ के लड़के विनय ने हरिद्वार में काम दिलाने की बात कही तो वह साथ चला गया। वहां पहुंचने पर काम नहीं मिला तो दोनों में कहासुनी हुई और विनय ने संदीप की पिटाई कर दी। संदीप ने मोबाइल पर अपनी मां को बताया तो उन्होंने उसे तत्काल वापस आने के लिए कहा। 27 अगस्त 2014 को मुरादाबाद तक बस से लौटा और रात को मोबाइल पर परिवारवालों से बात कर बताया था कि अगली सुबह वह घर पहुंच रहा है। लेकिन वहीं से वह बिना बताए नोएडा चला गया और साल भर तक परिवारवालों से संपर्क तक नहीं किया। इधर परिवारवालों ने संदीप के अगवा किए जाने और अनहोनी होने की आशंका संबंधी रिपोर्ट जलालाबाद के अलावा पहले हरिद्वार के सिडकुल थाने में और फिर मुरादाबाद के मझोला थाना में दर्ज कराई थी। 22 सितंबर 2014 को जलालाबाद थाना क्षेत्र के गांव जिगनेरा के बाहर स्थित तालाब में एक करीब 30 साल की युवक की लाश बरामद हुई थी। पोस्टमार्टम में शव पांच दिन पुराना होने, सीने और पीठ पर चोट के निशान एवं गले को फंदे से कसने के चलते मौत होने की बात सामने आई थी। इसके छह दिन बाद अल्हागंज के गांव रघुनाथपुर निवासी प्रदीप मिश्रा ने मोर्चरी पर जाकर हलफनामा देकर अपने भाई का शव होने की शिनाख्त की। उसके बयान के आधार पर हरिद्वार और मुरादाबाद के थानों में दर्ज केस जलालाबाद में दर्ज केस में मिला दिए गए और नामजद पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने जब डीएनए टेस्ट कराया तो वह निगेटिव निकला। ऐसे में केस क्राइम ब्रांच को सौंपा गया। क्राइम ब्रांच ने घरवालों के फोन सर्विलांस पर डाल दिए। छह माह पहले संदीप ने घरवालों से बात की तो पुलिस को पता चला गया कि संदीप जिंदा है। इसके बाद उसे नोएडा से शाहजहांपुर लाया गया।