बरेली-रोजा पैसेंजर का इंजन शुक्रवार की रात प्लेस होते समय बेपटरी हो गया। इंजन के छह पहिए जमीन में धंस गए। रेलवे यार्ड में डिरेल होने के कारण यातायात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, लेकिन इस इंजन को पटरी पर लाने के लिए एआरटी कर्मियों को साढ़े चार घंटे तक पसीना बहाना पड़ गया। इस दुर्घटना में शंटर पायलट और शंटिंग मास्टर की लापरवाही उजागर हुई है।
बरेली से चलकर रोजा तक आने वाली 54356 डाउन शुक्रवार की रात करीब साढ़े नौ बजे रोजा पहुंची थी। यात्रियों को उतारने के बाद इसके रैक को अप लाइन पर रिप्लेस किया जाना था, जिसके लिए शंटर पायलट श्रीशंकर और शंटिंग मास्टर बाबूलाल को लगाया गया था।
रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि रेलवे ओवर ब्रिज के पास प्वाइंट संख्या 260 खुला हुआ था। इसमें पत्थर फंसा था जो टूवे होने के कारण सेट नहीं सका था। इस पर शंटिंग मास्टर और शंटर चालक ने ध्यान नहीं दिया और इंजन को आगे चलाते रहे। तेज रफ्तार होने के कारण इंजन के आगे छह पहिए पहले बेपटरी हुए फिर जमीन में धंस गए।
दुघर्टना की जानकारी होते ही लोको प्रभारी एचके त्रिवेदी, रेलपथ अभियंता हरगोविंद, सीनियर सेक्सन इंजीनियर डीएल वर्मा और एआरटी प्रभारी रविकुमार, सीनियर लोको निरीक्षक एमपी कौशिक मौके पर पहुंच गए। शुक्रवार रात दस बजे से लेकर ढाई बजे रात तक काफी प्रयास के बाद इंजन को पटरी पर लाया जा सका है। घटना के कारणों की जांच के लिए बनाई गई ज्वाइंट कमेटी ने इस दुर्घटना के लिए शटिंग मास्टर बाबूलाल एवं शंटर पायलट श्रीशंकर को जिम्मेदार ठहराया है और रिपोर्ट मंडलीय कार्यालय भेज दी है।