लीड सुखजीत सिंह हत्याकांड के खुलासे में पंजाब के सुल्तानपुर लोधी के डीएसपी और सुखजीत के रिश्ते के चाचा प्यारा सिंह उर्फ बिल्ला पहलवान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुखजीत के घर मौजूद डीएसपी ने अमर उजाला से बातचीत में पूरे मामले की जानकारी दी।
डीएसपी प्यारा सिंह, सुखजीत सिंह के पिता बल्देव सिंह की बुआ के पुत्र हैं। कपूरथला के गांव पजिया निवासी प्यारा सिंह सुल्तानपुर लोधी (पंजाब) के डीएसपी हैं। उन्होंने बताया कि दो सितंबर की सुबह उन्हें सुखजीत की हत्या की जानकारी मिली। आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि सुखजीत की पत्नी का व्यवहार बेहद संदिग्ध है। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराते हुए छुट्टी ले ली। उन्हें इस बात की जानकारी थी कि उनके गांव से मात्र चार किमी की दूरी के गांव जैनपुर के मूल निवासी मिट्ठू सिंह से सुखजीत की दोस्ती है और वह भी सुखजीत के साथ भारत आया था। उन्होंने हलका थानाध्यक्ष को जैनपुर भेजा।
एसओ ने मिट्ठू सिंह के पिता जीत सिंह से बात कराई तो जीत सिंह ने बताया कि वह खुद पुत्र को लेकर परेशान हैं। वह 31 अगस्त को मिट्ठू सिंह को दुबई जाने के लिए अमृतसर एयरपोर्ट छोड़ आए थे, लेकिन वह अभी तक दुबई नहीं पहुंचा है। इस पर डीएसपी का शक मिट्ठू सिंह पर गहरा गया।
डीएसपी ने मिट्ठू सिंह के मोबाइल की सीडीआर और कॉल डिटेल निकलवाई तो पता चला कि वह दुबई नहीं गया है। एक अगस्त को उसके मोबाइल की लोकेशन शाहजहांपुर, बसंतापुर आदि में मिली। एक सितंबर की रात 10 बजे मिट्ठू सिंह की रमनदीप कौर से बात भी हुई थी। इसके बाद रात में डेढ़ बजे फिर बात हुई। दो सितंबर को मिट्ठू सिंह की लोकेशन दिल्ली एयरपोर्ट के आसपास मिलने पर उन्होंने पूरे मामले से शाहजहांपुर के एसपी डॉ. मनोज कुमार को अवगत कराया। इसके बाद एसपी ने सुखजीत के यहां से मिट्ठू सिंह का फोटो मंगवाकर एयरपोर्ट अधिकारियों को भेजा। हत्याकर दुबई भागने की तैयारी में मिट्ठू को एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया गया और शनिवार को ही शाहजहांपुर पुलिस दिल्ली जाकर उसे बंडा ले आई। उससे पूछताछ के बाद रमनदीप कौर को भी हिरासत में ले लिया गया।
गद्दार निकला बचपन का दोस्त
सुखजीत का बचपन का दोस्त गद्दार निकला, तो पत्नी भी बेवफा निकली। पुलिस सूत्रों के अनुसार मिट्ठू और रमनदीप कौर ने भारत में आने से पहले ही दुबई में सुखजीत की हत्या का प्लान बना लिया था।
वर्ष 1990 में सुखजीत सिंह के पिता बल्देव सिंह, सुखजीत का एडमिशन कराने जालंधर जा रहे थे। बरेली के आगे मार्ग दुर्घटना में बल्देव सिंह और उनके दोस्त की मौत हो गई, जबकि पत्नी वंश कौर घायल हो र्गइं। कुछ दिन बाद मां वंश कौर ने पति की इच्छानुसार सुखजीत का एडमिशन जालंधर के स्कूल में करा दिया। इसी स्कूल में पढ़ रहे मिट्ठू सिंह और सुखजीत के बीच गहरी दोस्ती हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ में मिट्ठू ने बताया कि उसकी शादी नहीं हुई है। काफी समय पहले रमनदीप कौर को देखते ही वह उसकी खूबसूरती पर फिदा हो गया था। दोनों के बीच सोशलसाइट्स पर चैटिंग होने लगी और कुछ दिन बाद ही रमनदीप कौर भी उससे प्यार करने लगी। इसके बाद वह जब भी इंग्लैंड जाता या सुखजीत दुबई आता तो वह लोग सुखजीत की निगाह बचाकर प्रेम की पींगें बढ़ाने लगे। जुलाई के प्रथम सप्ताह में सुखजीत अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दुबई आया तो दोनों ने मिलकर सुखजीत को रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया। हत्या के बाद दोनों वापस इंग्लैंड और दुबई चले जाते और मामला ठंडा पड़ने के बाद शादी कर लेते।
योजना के तहत ही मिट्ठू दोस्त के साथ ही दुबई से भारत आया और देश में घूमने के दौरान भी उसके साथ ही लगा रहा। उसने सुखजीत को रास्ते से हटाने के लिए भाड़े के लोगों की मदद ली। 22 अगस्त को वह घर जाने की बात कहकर बसंतापुर से चला तो योजना के तहत रमनदीप कौर ने अपने पति से उसे शाहजहांपुर तक छोड़ देने को कहा। इस दिन वापसी में सुखजीत पर हमला कर उसे मौत के घाट उतारने का प्लान था। हुआ भी वैसा ही। वापसी में पुवायां बंडा मार्ग पर सुखजीत पर हमला हुआ, लेकिन हमला करने वाले सुखजीत के पास मौजूद एयर पिस्टल से डरकर भाग निकले और हत्या की योजना धरी की धरी रह गई।
इसके बाद फिर से सुखजीत को मारने का प्लान तैयार किया गया। इसके तहत मिट्ठू सिंह 31 अगस्त को अमृतसर एयरपोर्ट से दुबई न जाकर शाहजहांपुर आ गया और एक होटल में रुका। एक सितंबर की शाम उसने बसंतापुर तक जाने और वापस आने के लिए आठ हजार रुपये में वाहन बुक किया और हत्या के बाद वापस आ गया। इसी दिन वह दिल्ली चला गया और दुबई जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा तो उसे पकड़ लिया गया।
रमनदीप सहित चार लोग हो सकते हैं हत्या में शामिल
सुखजीत की हत्या में पत्नी रमनदीप समेत चार लोगों के शामिल होने की आशंका है। मृतक के बड़े पुत्र अर्जुन सिंह का कहना है कि उसने घटना की रात पिता के पास तीन लोगों को खड़े देखा था। अर्जुन सिंह ने बताया कि जिस रात पिता की हत्या हुई है उस रात वह कमरे में लेटा था। रात में उसकी आंख खुली तो मां रमनदीप कौर उसकी चारपाई के पास खड़ी थीं, जबकि पिता के पास तीन लोग खड़े थे। उसके जागने पर मां ने उसको चादर ओढ़ा दी और सो जाने का इशारा किया। इसके बाद उसे कुछ पता नहीं चल सका।
फोटो नंबर 16 में
छोटे भाई के कारण
नहीं रो पा रहा अर्जुन
पुवायां। सुखजीत सिंह की हत्या और रमनदीप कौर के पुलिस गिरफ्त में चले जाने पर सुखजीत का बड़ा पुत्र 10 वर्षीय अर्जुन सिंह पूरे मामले को समझ रहा है, लेकिन पूरा मामला उसके छोटे भाई सात वर्षीय एमन की समझ से परे है। शुक्रवार सुबह पिता की हत्या के बाद भी वह पेड़ पर चढ़कर अमरूद तोड़ता रहा और शनिवार को भी शांत रहा। परिवार के लोगों और अर्जुन ने उसे बताया है कि पिता बाहर गए हैं और मां दवा लेने गई हैं।
मान कर चल रहे थे भारत
में लचर है कानून व्यवस्था
पुवायां। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में मिट्ठू सिंह और रमनदीप कौर से यह पूछा गया कि हत्या करने के लिए उन्होंने सुखजीत का घर ही क्यों चुना तो दोनों ने बताया कि दुबई और इंग्लैंड में कानून व्यवस्था बहुत सख्त है, जबकि भारत में कानून व्यवस्था इतनी अच्छी नहीं। उनका मानना था कि योजना बनाकर हत्या करने के बाद वह पुलिस के फंदे में नहीं फंस सकेंगे और आराम से इंग्लैंड और दुबई निकल जाएंगे, लेकिन भारत की पुलिस और कानून व्यवस्था पर उनकी सोच गलत साबित हुई और पुलिस ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए दोनों का धर दबोचा।