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ऐसे क्रूर अपराधियों को सजा देना न्यायालय की जिम्मेदारी

Wed, 27 Jul 2016 11:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहजहांपुर
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फांसी की सजा - फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
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बहुचर्चित आफरीन मर्डर केस में बुधवार को सुनाए गए फैसले में अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम गोपाल उपाध्याय ने इस घटना को विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध मानने की वजहों को भी स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा है कि हजारों बच्चे रोज सुबह स्कूल जाते हैं। उनके अंदर व्याप्त भय को दूर करने के लिए ऐसे क्रूर अपराधियों (जो मासूम और असहाय बच्चों को निशाना बनाते हैं) को कठोर सजा देना न्यायालय की जिम्मेदारी है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। ये अपराधी न केवल सिर्फ न्यायिक अंतर्विवेक पर बल्कि समाज के सामूहिक अंतर्विवेक को भी आघात पहुंचाते हैं। अत: वाद के तथ्यों, हालातों और सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्थाओं के प्रकाश में यह हत्या विरल से विरलतम अपराध की श्रेणी में आती है। 
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न्यायाधीश ने अपने फैसले में लिखा है कि घटना के समय अभियुक्त फिरोज 47 साल का रहा होगा। वह किशोर या जवानी की अवस्था का नहीं बल्कि पूर्ण परिपक्व और अब 50 साल का व्यक्ति है। उसने 10 साल के मासूम बच्ची की नृशंस हत्या की है और इस उम्र में उसके सुधरने की भी कोई संभावना नहीं है। वह मानसिक रूप से विक्षिप्त भी नहीं है और न्यायालय के प्रश्नों का विवेक से उत्तर दिया है। जिस तरह से कत्ल को अंजाम दिया गया वह सभ्य समाज के लिए कलंक है। एक मासूम लड़की स्कूल ड्रेस में अपनी टाई, बेल्ट पहने पीठ पर बैग टांगकर कर स्कूल जा रही थी और उसके मां - बाप दरवाजे पर खड़े पर उसे देख रहे थे। और बिना किसी ठोस आधार के अभियुक्त द्वारा पहले तो बच्ची को बैग सहित हाथ मारकर गिरा दिया और फिर अपने हाथ में लिए हुए फावड़े से उसकी गर्दन पर तब तक वार किया जबतक कि गर्दन अलग होकर दो - तीन कदम दूर जाकर नहीं गिर गई। मां-बाप के तो होश उड़ना स्वाभाविक था, समाज में इस दुस्साहसी, क्रूर और निर्दयी वारदात से दहशत फैल गई। अभियुक्त का मकसद सिर्फ बच्ची को मारना ही होता तो वह फावड़े के उल्टी तरफ से सिर या शरीर पर चोट पहुंचाकर हत्या कर सकता था लेकिन उसका उसका मकसद निर्मम, बर्बर तरीके से हत्या कर परिवार और आसपास के लोगों में दशहत पैदा करना था जो उसके आपराधिक चरित्र को प्रदर्शित करता है। 
 
आफरीन की अम्मी बोलीं : मिल गया इंसाफ
शाहजहांपुर। बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम की अदालत में आफरीन मर्डर केस का फैसला सुनने को मोहल्ला निसरजई से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शहर के दूसरे हिस्सों से भी कई लोग पहुंचे थे। इन्हीं में निहत आफरीन के गमजदा परिवारवाले भी चुपचाप हिकारत भरी निगाहों से कभी कटघरे में खड़े में अभियुक्त को देखकर मुंह फेर लेते और कभी इंसाफ की आस में दोनों हाथों से दुआ करते दिखे। जज ने फैसला पढ़कर सुनाया तो अपने पैरवीकार अधिवक्ता फिरोज हसन खां के साथ आफरीन की अम्मी शाहिदा बेगम कोर्ट कक्ष से बाहर निकलीं और मीडिया से रूबरू होते ही कहा कि आज उनके कलेजे को ठंडक पहुंची और मासूम बेटी की मौत का इंसाफ मिल गया। उनकी आंखों से आंसू छलक रहे थे। उनके साथ मौजूद आफरीन के अब्बा इकरार अली, सगी बहन निशा, सगे भाई इमरान अली और इरफान अली एवं चाचा (फलक के अब्बा) आजाद अली, दिलशाद अली और चाची बिलकिश अली ने फैसले पर खुशी जाहिर की। पूरा परिवार फैसला सुनने के बाद भावविह्वल था और सभी का गला भर्राया हुआ था।
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