सत्ता की हनक व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। पुलिस भी लाचार दिख रही है। आलम यह है कि निजी मसलों को जनहित का मुद्दा बताकर भाजपाई अफसरों से भिड़ रहे हैं। कानून-व्यवस्था को खतरा बन रही इन घटनाओं से अफसर भी परेशान हैं। कुछ मामलों में पुलिस ने भाजपाइयों के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज की है लेकिन उनकी गिरफ्तारी की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। तीन महीनें में हुई तीन बड़ी घटनाओं से पुलिस की कानूून-व्यवस्था को दुरुस्त रखने के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।