थाना क्षेत्र के अर्जुनपुर मजरा गांव में पींग के विक्रम सिंह की पिटाई करने के बाद गला दबाकर हत्या करने के बाद लाश गन्ने के खेत से फेंक दी गई। विक्रम सिंह शनिवार की रात से घर से लापता था। परिवार वाले गांव के दो लोगों पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है। तीन दिन में दूसरी हत्या की वारदात से क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है।
थाना क्षेत्र के पींग निवासी विक्रम सिंह (40) शनिवार रात आठ बजे अचानक लापता हो गये थे। उनका बेटा विष्णु और भतीजा कल्लू रात भर उनकी तलाश करते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। रविवार को कल्लू जब विक्रम का पता करते करते अर्जुनपुर गांव के मजरा के पास एक गन्ने के खेत में पहुंचा तो उसे वहां उसकी लाश पड़ी देखी। दोनों ने पुलिस को बताया कि विक्रम सिंह शराब के आदी थे और अक्सर अर्जुनपुर में कच्ची शराब का कारोबार कर रहे दो लोगों के यहां जाते थे। शक है कि उन लोगों ने पैसे न देने पर विक्रम सिंह का पिटाई करने के बाद गला दबाकर हत्या कर दी और फि र चेहरे को भी बेरहमी से कुचला गया।
सूचना पाकर प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र देव पाठक और दरोगा तेजपाल सिंह दल बल के साथ मौके पर गये और शव को कब्जे मे लिया। दोनो आरोपियों की तलाश में दबिश दी लेकिन आरोपी फरार हो गये। मृतक के परिवारीजन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज किये जाने की प्रक्रिया जारी है।
विक्रम सिंह की लाश अर्जुनपुर के मजरा से बरामद हुयी है। शनिवार की शाम से लापता होने की बात कही जा रही है लेकिन कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं करायी गयी थी। शव क्षत विक्षत है। जिसका पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
- नरेंद्र देव पाठक, प्रभारी निरीक्षक रोजा
अर्जुनपुर के मजरा में धड़ल्ले से
चलता है कच्ची का कारोबार
दस घरों के अर्जुनपुर के मजरा गांव मे कच्ची शराब का कारोबार धड़ल्ले से चलता है। यहां के लोगों ने बताया कि शाम ढलते ही आस पास के आपराधिक तत्वों का इस गांव में जमावड़ा लगता है। यहां कभी पुलिस नहीं आती। कहने के तो यह क्षेत्र गुर्री चौकी के अंतर्गत आता है, लेकिन यहां तैनात दर्जन भर पुलिस कर्मी सिर्फ हाईवे की निगरानी में ही जुटे रहते हैं।
हत्यारों को बचाने में
लगे कुछ असरदार
विक्रम सिंह की मौत के जिम्मेदार दो आरोपियों को बचाने मे सिंगरहा के प्रभावशाली व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है? मृतक के परिजनो का आरोप है कि आरोपी सिंगरहा के व्यक्ति का ट्रैक्टर चलाता है और कच्ची के कारोबार में लिप्त रहते है जिनके संरक्षण में पुलिस भी कच्ची के कारोबारियों पर कार्यवाही करने से कतराती है।