शस्त्र लाइसेंस में फर्जीवाड़ा और शस्त्रों का दुरुपयोग रोकने के लिए उन्हें ऑनलाइन कराने में लाइसेंस धारक दिलचस्पी नहीं ले रहे। पिछले छह माह में केवल एक हजार लाइसेंस धारकों ने शस्त्रों का डेटा ऑनलाइन कराया, जबकि जिले में लाइसेंसी शस्त्र धारक लगभग 40 हजार हैं। शस्त्र लाइसेंस ऑनलाइन नहीं कराने पर संबंधितों को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा क्योंकि अगले साल एक अक्तूबर से ऑनलाइन न होने वाले लाइसेंस स्वत: ही निरस्त हो जाएंगे।
तमाम गड़बड़ियों और परेशानियों से बचने के लिए गत जून में केंद्र और प्रदेश सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर शस्त्र लाइसेंस ऑनलाइन करने की व्यवस्था लागू की थी। इसके लिए थाना स्तर पर शस्त्र धारकों की बैठकें करके उन्हें लाइसेंस ऑनलाइन कराने को फॉर्म भरने के लिए दिए गए। बावजूद इसके लोगों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। यही नहीं शस्त्र अनुभाग या थानों से फॉर्म लेने के बाद में अलग से कोई नहीं पहुंचा। वहीं प्रभारी अधिकारी शस्त्र जयनाथ यादव ने बताया कि ऑनलाइन शस्त्र धारक को दिए जाने वाले आईडी नंबर से उसकी पहचान आसान हो जाएगी। ऐसे लाइसेंसों का विवरण नेशनल डेटा बेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस साफ्टवेयर (एनडीएनएल) पर डाला जा रहा है। कहीं बाहर जाने पर संबंधित अधिकारी एनडीएनएल पर आईडी नंबर डालकर क्लिक करते ही लाइसेंस का सत्यापन कर सकेंगे। इससे लाइसेंस धारक को ही आसानी होगी।