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अखबार वितरक की सड़क दुर्घटना में मौत

Wed, 15 Jul 2015 08:35 PM IST
शाहजहांपुर
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बुधवार सुबह अखबार वितरण कर रहे चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला दिलावरगंज निवासी 50वर्षीय श्रवण शुक्ला उर्फ पप्पू पंडित को नेशनल हाईवे पर बरेली मोड़ के पास अज्ञात ट्रक ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल श्रवण को पुलिस जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। खबर सुनकर जिला अस्पताल पहुंचे अखबार वितरकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। कोतवाली पुलिस ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत किया।
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श्रवण बुधवार सुबह करीब सात बजे अखबार बांटते हुए बरेली मोड़ पहुंचे। वह साइकिल से जब नेशनल हाईवे पर फौजी ढाबा के सामने पहुंचे तभी तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने टक्कर मार दी। इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। श्रवण के साथी सत्यदेव ने जब हादसा देखा तो तुरंत इसकी सूचना घरवालों और अन्य वितरकों को दी। मौके पर पहुंची पुलिस श्रवण को जिला अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
हादसे की खबर मिलने पर कुछ ही देर में तमाम वितरक जिला अस्पताल पहुंच गए और ट्रक न पकड़े जाने पर हंगामा करने लगे। इसी बीच कोतवाली इंस्पेक्टर केके तिवारी फोर्स के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने वितरकों को समझा-बुझाकर शांत किया। इसके बाद शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। श्रवण की पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। दोपहर बाद श्रवण का गर्राघाट श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके इकलौते बेटे प्रांशु ने दी।
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आखिर चार बेटियों के कैसे पीले होंगे हाथ
शाहजहांपुर। अखबार वितरक श्रवण शुक्ला की मौत के बाद उनकी कच्ची गृहस्थी के भरण-पोषण और चार बेटियों की शादी का सवाल खड़ा हो गया है। अब घर में दूसरा कोई कमाने वाला भी नहीं है। ऐसे में बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण और उनकी शादी कैसे होगी, ये सवाल वहां मौजूद हर व्यक्ति की जुवान पर थे। हालांकि यह तय है कि शहर के संवेदनशील लोग इस परिवार की मदद के लिए जरूर आगे आएंगे।  
श्रवण के चार बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी 24 वर्षीय रूबी और उससे छोटी 21 वर्षीय प्रिया है। तीसरी बेटी 18 वर्षीय सुरभि और जुड़वां पैदा हुए 14 वर्षीय बेटी नैना और बेटा प्रांशु हैं। परिवार के पालन-पोषण के लिए श्रवण रोजाना सुबह तीन बजे रेलवे स्टेशन पहुंच कर अखबार लेते थे और फिर उनका बरेली मोड़ और रिलायंस थर्मल पॉवर तक वितरण करने जाते थे। इतनी मेहनत सिर्फ इसलिए करते थे क्योंकि वह बड़ी दो बेटियों की शादी को लेकर फिक्रमंद थे।
दोनों छोटी बेटियों और बेटे की पढ़ाई को लेकर भी खासे चिंतित रहते थे। जीवन यापन का केवल एक ही सहारा था अखबार वितरण। घर के खर्च पूरे होने में जब दिक्कत आई तो रूबी और प्रिया ने स्कूलों में पढ़ाकर पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया। श्रवण मौत के बाद उनकी बेटियों की शादी और परिवार के पालन पोषण की समस्या खड़ी हो गई है।

हाय पापा...अब हम क्या करेंगे!
शाहजहांपुर। श्रवण का शव घर पहुंचते ही उनकी पत्नी और बेटियां दहाड़ें मारकर रोने लगीं। बेटियां रोते हुए बार-बार यही कह रहीं थीं कि हाय पापा...अब हम क्या करेंगे। लड़कियों को इस तरह बिलखते देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।

परिवार की मदद को बढ़ने लगे हाथ
शाहजहांपुर। वरिष्ठ सपा नेता उपेंद्रपाल सिंह ने अखबार वितरक श्रवण की मौत पर शोक जताया है। कहा, वह दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ हैं। गुरुवार को वह परिवार से भेंट कर यथा संभव आर्थिक मदद करेंगे।

पाठकों पर बकाया था भुगतान
श्रवण की पत्नी के मुताबिक, उनके कई ग्राहक ऐसे थे, जो एक-एक साल का इकट्ठा भुगतान करते थे। तमाम ग्राहक एक महीना रोककर पैसे देते थे। चालू महीने में भी वह 15 दिन अखबार डाल चुके थे। इसका तो पूरा भुगतान ही बकाया है। श्रवण की पत्नी ने ग्राहकों से अनुरोध किया है कि वह उनके मोबाइल नंबर-8081068608 पर संपर्क कर बकाया भुगतान कर सकते हैं। दुख की इस घड़ी में उन्हें सभी के सहयोग की जरूरत है।
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