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मंदिर में शादी कर प्रेमी युगल ने जहर खाकर दी जान

Sat, 06 May 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
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क्षेत्र के गांव गोरा में बृहस्पतिवार रात गांव के बाहर मंदिर में प्रेमी युगल ने शादी करने के बाद जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी। जहर खाने के बाद युवक ने मोबाइल से घरवालों को जानकारी दी। अस्पताल पहुंचने से पहले दोनों ने दम तोड़ दिया। सीओ तिलहर ने मौका मुआयना कर घटना की जानकारी ली। पुलिस ने अतुल के पास से सुसाइड नोट बरामद कर अपने कब्जे में ले लिया है। दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। 
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गांव गोरा निवासी अतुल कुमार (22) पुत्र परशुराम के  गांव की सुमित्रा (17) पुत्री मुकेश के साथ काफी समय से प्रेम संबंध थे। परिवारवालों की गैर मौजूदगी में दोनों एक दूसरे से छिप-छिपकर मिलते थे। दोनों के प्रेम संबंध इतने मजबूत हो गए कि एक दूसरे के साथ जीने-मरने की कसमें खा लीं, लेकिन दोनों के परिवारवालों को ये मंजूर नहीं था। बृहस्पतिवार रात लगभग ढाई बजे दोनों गांव के ही नजदीक देव स्थान पर मिलने पहुंचे। जहां शादी कर दोनों ने एक साथ जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ देर बाद जब दोनों की हालत बिगड़ने लगी, तब अतुल ने अपने सेलफोन से कॉल करके घरवालों को बताया कि उसने और सुमित्रा ने जहर खा लिया है। जानकारी मिलते ही दोनों के घरवाले मौके पर पहुंचे तो उनके मुंह से झाग निकल रहे थे। तुरंत ही सूचना 108 एंबुलेंस को दी गई। दोनों को एक ही एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया जा रहा था, कि रास्ते में पहले अतुल ने फिर सुमित्रा ने दम तोड़ दिया। दोनों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर सीओ तिलहर मनोज यादव व जैतीपुर थानाध्यक्ष ने मौका मुआयना कर घटना की जानकारी ली और सुसाइड नोट भी बरामद किया। इसके बाद दोनों के शव पोस्टमार्टम का भेज दिए गए।

सुसाइड नोट मिला है। जिसमें दोनों ने अपनी मर्जी से मंदिर में शादी कर जहर खाने की बात कही है। दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। 
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          मनोज यादव, सीओ तिलहर

हम एक दूसरे के बिना रह नहीं सकते 
जैतीपुर। जहर खाकर जान देने वाले प्रेमी युगल ने अपना दर्द सुसाइड नोट में लिख छोड़ा है। प्रेमी अतुल के पास से मिले सुसाइड नोट में लिखा है कि हम लोग अपनी मर्जी से शादी करके जहर खा रहे हैं। इसमें और किसी का कोई दोष नहीं है क्योंकि हम एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते। हमारे घर वाले हमें मिलने नहीं देंगे। दोनों का यह दर्द जाहिर करता है कि उनके संबंध काफी समय से थे और घरवालों ने दोनों के मिलने पर बंदिश लगा रखी थी।
दोनों के मकान की छत आपस में मिली हुई है। मकान की दीवार एक है और निकास अपने-अपने दरवाजे से है। पास में ही मकान होने के कारण दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। चर्चा है कि दोनों के संबंध लगभग दो साल से थे। वे एक-दूसरे से चोरी छिपे मिलते थे। घरवालों को जानकारी हुई तो दोनों के मिलने पर पाबंदी लगा दी गई। परशुराम ने भी बेटे अतुल को बाहर काम करने के लिए भेज दिया। एक माह तक वह दिल्ली में रहा, लेकिन उसका मन सुमित्रा के बिना नहीं लगा। पिता परशुराम के मुताबिक वह बृहस्पतिवार सुबह दस बजे दिल्ली से घर आया और हाईस्कूल के प्रमाण पत्र आदि कागजात लेकर आधा घंटे बाद ही दिल्ली जाने की बात कहकर चला गया। परशुराम ने बताया कि रात लगभग ग्यारह बजे सुमित्रा की मां आशा देवी ने घर आकर बताया कि सुमित्रा गायब है, तो उसने बेटे अतुल से फ ोन पर संपर्क किया। इस पर उसने बताया कि वह मुरादाबाद में है और लड़की के बारे में कुछ नहीं पता। रात लगभग ढाई बजे अतुल का फोन आया और उसने बताया कि हम दोनों ने जहर खा लिया है और वह लोग गांव के ही पास देव स्थान मंदिर में हैं। ये सुनकर परिवार में कोहराम मच गया और दोनों के परिवार के लोग मौके पर पहुंचे तो दोनों के मुंह से झाग निकल रहे थे। अस्पताल पहुंचने से पहले ही दोनों ने दम तोड़ दिया। अतुल चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था जबकि सुमित्रा दो भाइयों से छोटी और तीन बहनों में सबसे बड़ी थी। 

सुमित्रा की तय हो चुकी थी शादी
तिलहर। अतुल से संबंध की जानकारी होने पर सुमित्रा के पिता मुकेश ने उसकी शादी अपनी पुरानी रिश्तेदारी में तय कर दी थी। जून माह के दूसरे हफ्ते शादी की तारीख भी निश्चित कर दी गई थी। वहीं अतुल की शादी भी तय कर दी गई थी। अतुल को सुमित्रा की शादी तय होने की खबर मिलने से वह अंदर से पूरी तरह से टूट गया।

कटरा में खरीदा सिंदूर और मौत का सामान
बताते हैं कि अतुल दिल्ली न जाकर कटरा बाजार में रहा और वहां उसने सिंदूर खरीदा और मौत का सामान भी। शाम के अंधेरे में अतुल अपने गांव पहुंचा और पूर्व निर्धारित समय के अनुसार सुमित्रा अतुल के बताए अनुसार गांव के दक्षिण स्थित सती माता के मंदिर पहुंच गई। वहां अतुल पहले से ही मौजूद था। वहां अतुल ने सुमित्रा की मांग में सिंदूर भरा और साथ-साथ मरने और जीने की कसम खाते हुए जहर पीकर दोनों ने अपनी इहलीला समाप्त कर ली।

डेढ़ सौ वर्ष पहले इसी स्थान पर सती हुई थी महिला
तिलहर। गांव वासियों के मुताबिक करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले गांव की एक महिला अपने पति के साथ इसी स्थान पर सती हो गई थी। अतुल और सुमित्रा ने सती को आदर्श मानते हुए अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। सती की स्मृति में जैतीपुर के गोरा गांव किनारे मंदिर बनवा दिया गया। यहां प्रतिवर्ष जेठ के महीने में मेला लगता है। गांव से करीब सौ गज दूरी पर ठाकुर भूराज सिंह के खेत के भूखंड पर स्थित सती के मंदिर परिसर में बिखरी टूटी चूडियां फैला सिंदूर और हवा के थपेड़े से उड़ती सुहाग की चुनरी यह बयां कर रही थी कि प्रेमी युगल के अरमानों की कसक अभी बाकी है।
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