तिलहर के गांव पिथनापुर में वर्ष 1999 में हुई लालाराम की हत्या और भतीजी पर जानलेवा हमले के मामले में तीन अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई गयी। मामले पर फैसला सुनाते हुए षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश फराह मतलूब ने दोष सिद्ध होने पर तीन अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा और 2.14 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माने की कुल धनराशि में से एक लाख रुपये मृतक लालाराम के वारिसों को और जख्मी कल्लो को 30 हजार रुपये क्षतिपूर्ति दिलाए जाने का आदेश दिया गया है। मुकदमे के दौरान आरोपी लज्जाराम की मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष के अनुसार तिलहर क्षेत्र के गांव पिथनापुर निवासी विक्रम सिंह ने दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया कि 20 मार्च 1999 की शाम 6:30 बजे जब बच्चों के बीच कहासुनी हो रही थी, इसी दौरान पड़ोसी रघुवीर, दिलासाराम तमंचे लेकर व रघुवीर के पिता लज्जाराम और दिमाक बहादुर बंदूकें लेकर आ गए और फायरिंग शुरू कर दी। इससे उसका र्भाई लालाराम और भतीजी कल्लो घायल हो गईं। ग्रामीणों के आ जाने पर हमलावर भाग गए। घायल लालाराम की तिलहर अस्पताल गेट पर मौत हो गई। चौथे दिन पुलिस ने रघुवीर व दिलासाराम को मय असलाह गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील उमेश गुर्जर की ओर से प्रस्तुत गवाहों के बयान व पुलिस की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन व बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त रघुवीर, दिलासाराम व दिमाक बहादुर को आजीवन कारावास व 70-70 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया। इसके साथ ही रघुवीर व दिलासाराम को आर्म्स एक्ट के तहत भी एक-एक हजार रुपये और दिमाक बहादुर को दो हजार रुपये के जुर्माने की अलग से सजा सुनाई गयी है।