निगोही थाना क्षेत्र के गांव मोहराइन में वर्ष 2012 में हुए कन्हैया लाल हत्याकांड में अपर जिला सत्र न्यायाधीश शाहिद रजा ने बृहस्पतिवार को आरोपी पत्नी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही सात हजार रुपये का जुर्माना भी डाला। घटना 24 अप्रैल, 2012 को हुई। मोहराइन निवासी राजपाल सिंह गन्ने का बीज तैयार करने के लिए गांव दिलावरपुर स्थित खेत में गए थे। घटनाक्रम के मुताबिक जब वह शाम साढ़े पांच बजे घर लौटे तो देखा कि एक कमरा अंदर से बंद था और उसमें से कट-कट की आवाज आ रही थी। राजपाल ने खिड़की से झांककर देखा तो उनके बेटे कन्हैया लाल की उसकी पत्नी पावित्री ने तलवार से गर्दन काट दी थी और वह सिर पर तलवार से वार कर रही थी। कन्हैया का सिर धड़ से अलग हो गया था। पावित्री कह रही थी कि पति शराब पीकर उसे मारता था, इसलिए उसने उसका काम तमाम कर दिया। राजपाल ने गांव के सुरेंद्र और लालू को बुलवाकर धक्का देकर कमरे की कुंडी तोड़ी और पावित्री के हाथ से तलवार छीनी। कन्हैया का दो वर्षीय बेटा रूपराम भी कमरे में था और रो रहा था। राजपाल की तहरीर के आधार पर पावित्री के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। अपर जिला सत्र न्यायाधीश शाहिद रजा ने गवाहों के बयान, बचाव पक्ष के तर्कों एवं केस के तथ्यों एवं परिस्थितियों के आधार पर पावित्री को अपने पति कन्हैया की हत्या का दोषी पाते हुए उसे आजावीन कारावास की सजा सुनाई।