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जिपं प्रत्याशी की कार से 10 पेटी देसी दारू बरामद

Sun, 11 Oct 2015 08:43 PM IST
रोजा।
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जिला पंचायत का चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी की कार में दस पेटी देसी शराब रोजा थाना क्षेत्रों के गांवों में भेजी जा रही थी, जिसे मौके पर तैनात दरोगा ने पकड़ लिया। पकड़ी गई शराब की कीमत करीब सवा लाख रुपये बताई जा रही है। मामले को सुलटाने के लिए आबकारी पुलिस और ठेकेदारों के गुर्गों का थाने पर जमावड़ा है। आरोप है कि शराब आबकारी विभाग और शराब के ठेकेदार की साठगांठ से सप्लाई की जा रही थी।
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रविवार की दोपहर करीब तीन बजे एसआई महिपाल सिंह को सूचना मिली की एक प्रत्याशी की कार में दस पेटी देसी शराब 13 अक्तूबर के द्वितीय चरण के मतदान के लिए रोजा क्षेत्र के गांवों में भेजी जा रही है।
दरोगा सिंह ने सिपाही विभोर कुमार के साथ हथौड़ा चौराहे के पास एक सफेद रंग की कार को रोका। तलाशी लेने पर उसमें दस पेटी देसी शराब बरामद हुई। कार का चालक उसके कागजात नहीं दिखा सका। लिहाजा देसी शराब कार सहित थाना रोजा आ गई।
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चुनाव के मौके पर कार से शराब की बरामदगी होते ही आबकारी विभाग के निरीक्षक एचएस शुक्ला, शराब ठेकेदार के गुर्गे रोजा थाने में आ गए। आबकारी विभाग के निरीक्षक एचएस शुक्ला ने पुलिस को बताया कि पकड़ी गई शराब गेट पास से गोदाम से निकाली गई थी, जो हथौड़ा से जमुका गांव के ठेके पर भेजी जा रही थी, लेकिन जल्दबाजी में उसका गेट पास सेल्समैन ने नहीं लिया था।
चर्चा है कि यह शराब जिला पंचायत के एक प्रत्याशी की कार से 13 अक्तूबर को होने वाले चुनाव के लिए रोजा क्षेत्र में भेजी जा रही थी, जिस कार से यह बरामद की गई वह भी जिला पंचायत के प्रत्याशी से संबधित लोगों की बताई जा रही है। फिलहाल, पुलिस ने आबकारी निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर कोई मामला दर्ज नहीं किया है।


चुनाव के मद्देनजर हमारी पुलिस चेकिंग कर रही थी। दस पेटी देसी शराब प्राइवेट कार से बरामद हुई है, लेकिन वह ठेकेदार की है जो जमुका के ठेके पर भेजी जा रही थी। मौके पर चालक गेट पास नहीं दिखा सका था, इसलिये पूछताछ की जा रही है। आबकारी विभाग के अनुसार शराब नंबर एक की है।
- आरएन चौधरी, प्रभारी निरीक्षक,रोजा


प्रशासन की पाबंदी के बाद
विभाग ने क्यों भेजी शराब
रोजा क्षेत्र के हथौड़ा चौराहे से कार से बरामद देशी शराब के मामले में आबकारी विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में है। जानकारी के अनुसार चुनाव के मद्देनजर जिला प्रशासन द्वारा शराब की बिक्री पर मतदान से 48 घंटे पहले पाबंदी लगा दी गई है। चुनाव 13 अक्तूबर को होने वाला है ऐसी स्थिति में विभाग ने गेट पास क्यों काटा? यदि काट भी दिया तो चालक बिना गेट पास के शराब लेकर क्यों चला? दूसरा यह शराब गोदाम से नहीं जा रही थी, बल्कि हथौड़ा के ठेके से भेजी जा रही तो इसमें गेट पास की क्या जरूरत थी। तीसरा महत्वपूर्ण यह है कि जिस कार से बरामदगी हुयी है वह ठेके से जुड़ी कार नहीं थी। प्राइवेट व्यक्ति की कार का उपयोग क्यों किया गया? इसका उत्तर न तो पुलिस के पास है ओर ना ही आबकारी निरीक्षक के पास? इतना साफ है कि द्वितीय चरण के मतदान में हो रही शराब की बिक्री में कहीं न कहीं इस कारोबार से जुड़े लोगों की अहम भूमिका है।
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