गढ़ियारंगीन थाना क्षेत्र में सोमवार की शाम को दो गांवों के दबंगों के बीच कटरी की जमीन पर कब्जे के लेकर फायरिंग हुई थी। इसमें हजरतपुर (बदायूं) के गांव धमी पट्टी नगरिया निवासी 24 वर्षीय महावीर को मौत हो गई थी। इस मामले में सात लोगों के खिलाफ हत्या, बलवा समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मृतक के परिवार वालों में दूसरे पक्ष के खिलाफ आक्रोश है।
थाना गढ़िया रंगीन के गांव मावड़ निवासी सुरेश यादव का गांव नगला निवासी अरुण कुमार उर्फ पप्पू से कटरी की जमीन पर कब्जे को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है। मृतक महावीर के भाई एवं ग्राम प्रधान ओमवीर सिंह ने थाने में दी तहरीर में बताया कि उनका गांव नगला निवासी अरुण से चकबंदी को लेकर एक साल से विवाद चल रहा है। सोमवार को उनकी भैंस खो गई थी। बड़े भाई सोरन, छोटे भाई महावीर और वीरेंद्र भैंस को तलाश करने निकले थे। भैंस को खोजते हुए तीनों लोग गांव मावड़ के पास पहुंच गए। खेत में पहले से गांव नगला निवासी अरुण कुमार उर्फ पप्पू और अरेंद्र, गांव मावड़ निवासी सुरेश, लेखराज, रामकिशोर और दातागंज (बदायूं) के गांव नौनी टिकन्ना निवासी तालेवर घात लगाए बैठे थे। हमलावरों ने महावीर को पकड़ लिया और खेत में ले जाकर गोली मार दी। यह देखकर उनके भाई सोरन और वीरेंद्र अपनी जान बचाकर भागे और गांव पहुंचकर घटना की जानकारी दी। गांव वालों के साथ वह घटनास्थल पर पहुंचे तो महावीर की का शव पड़ा हुआ था। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 302, 34 में दर्ज किया है।
घटना के बाद करीब डेढ़ घंटे हुई फायरिंग
महावीर की मौत के बाद दोनों पक्षों में करीब डेढ़ घंटे जमकर फायरिंग हुई। सूचना मिलने पर थाना गढ़िया रंगीन, जैतीपुर, कलान, मदनापुर और जलालाबाद की पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने फायरिंग करने वालों की घेराबंदी करके चेतावनी दी तो फायरिंग बंद हुई।
देर से पुलिस पहुंचने का लगाया आरोप
मृतक के भाई ओमवीर सिंह ने आरोप लगाया कि घटना के तीन घंटे बाद गढ़िया रंगीन पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के देर से पहुंचने से आरोपियों के हौसले बुलंद हो गए और उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी।
कटरी पर कब्जे और जानवरों की फिरौती का था काम
मृतक के भाई सोरन, गांव नगला का अरुण कुमार उर्फ पप्पू और गांव मावड़ निवासी सुरेश कटरी में जानवरों की फिरौती और कटरी की जमीन पर कब्जे का काम करते थे। पिछले कुछ समय से पप्पू अलग हो गया था। सुरेश और सोरन साथ में काम करते रहे। अरुण अपने कुछ साथियों के साथ कटरी की जमीन पर कब्जा करने लगा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में रंजिश हो गई। कटरी की जमीन को लेकर फायरिंग होती रहती है। 15 दिन पहले भी उनमें फायरिंग हुई थी।
सुरेश का पिता रपड़ा कांड का था मुख्य अभियुक्त
कई साल पहले रपड़ा कांड में छह-सात लोगों को जिंदा जला दिया गया था। इस मामले में गांव भावड़ निवासी सुरेश के पिता राम सिंह नेता मुख्य अभियुक्त था। राम सिंह हिस्ट्रीशीटर भी था। इसके बाद भी सुरेश को रायफल का लाइसेंस मिल गया।
फायरिंग के लिए कहां से आते हैं कारतूस
सुरेश पक्ष और अरुण पक्ष में कटरी की जमीन पर कब्जे को लेकर आए दिन फायरिंग होती रहती थी। जांच का विषय यह है कि इतनी फायरिंग के लिए उनके पास कारतूस कहां से आते थे।