महज 3500 रुपये के लिए मजदूर वेदपाल की जान लेने की वारदात में पुलिस भी कम जिम्मेदार नहीं है। परिजनों के अनुसार 20 मई को रुपये मांगने पर ठेकेदार ने मुनीम और दो अन्य मजदूरों के साथ उसकी पिटाई की थी। जिसकी जानकारी यूपी 100 पुलिस को दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। यहीं नहीं वारदात स्थल से महज 50 कदम की दूरी पर यूपी 100 की गाड़ी के खड़ी होती है यदि पुलिस रात में गश्त लगाती तो मजदूर की जान बच सकती थी।
मृतक वेदपाल के भाई सर्वेश ने पुलिस को बताया कि ठेकेदार शब्बीर से मजदूरी के रुपये मांगने पर 20 मई को उसके भाई वेदपाल का विवाद हो गया था। शब्बीर ने मुनीम रमेश व दो अन्य मजदूरों के साथ मिलकर उसके भाई की पिटाई की थी। इस बात की जानकारी भतीजे संजीव ने दी, क्योंकि संजीव भी उस दिन मजदूरी के लिए मौजूद था। मारपीट की घटना के बाद उसके भाई को इस बात का अंदाजा नहीं था कि रविवार काम पर जाने के बाद वह घर नहीं लौट पाएगा।
इस वारदात के पीछे के परिजन यूपी 100 पुलिस को भी कसूरवार मान रहे हैं। भाई सर्वेश का आरोप है कि 20 मई को हुए झगड़े की जानकारी पुलिस को दी गई थी। घटना स्थल से महज 50 कदम की दूरी पर यूपी 100 हर समय रहती है। 21 मई की रात भी यूपी 100 वहीं पर थी। भाई केे गुम होने की रात उसको भी सूचना दी गई, तो कहा गया कि 100 नंबर पर डॉयल करो, तभी देखेंगे। आरोप है कि यूपी 100 के जवान यदि रात ही तत्परता दिखाते, तो उसके भाई वेदपाल की जान बच जाती। इस पूरे मामले से एएसपी को भी अवगत कराया गया है।
कोट्स
जमुही गांव में एक मिल की नींव की मिट्टी दबा युवक का शव बरामद हुआ है। घरवाले ठेकेदार और मुनीम पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। शव पोस्टमार्टम को भेजा गया है।
- कमल किशोर एएसपी सिटी
इनसेट
दो घंटे जाम में पसीने से तर-बतर हो गए राहगीर
ग्रामीणों ने राजमार्ग को करीब दो घंटे बाधित रखा। इससे राजमार्ग पर लंबी जाम लग गई। हालत तब और गंभीर हो गई जब अधिकारियों को घटना स्थल पर पहुंचने के लिए अपने वाहन दूर खड़े कर पैदल मौके पर जाना पड़ा। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों की राहगीरों से तीखी झड़पें भी हुई। भीषण गर्मी में लगे जाम से बस में सवार यात्री पानी के लिए भटकते रहे।
हंगामा कर रहे कोटेदार को एसडीएम ने कसा
वेदपाल की मौत के बाद राजमार्ग पर हंगामा कर रहे चकभिटारा के कोटेदार को मौके पर एसडीएम सदर रामजी मिश्रा ने आडे़ हाथों ले लिया। एसडीएम ने कोटेदार को किनारे ले जाकर कानून का पाठ पढ़ाया और कहा कि उसेे तो प्रशासन का सहयोग करना चाहिए और वह यहां परेशानी पैदा कर रहा है। कहा कि वह उसके बारे में बाद में देखेंगे। एसडीएम के हड़काने पर कोटेदार की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और वह परिजनों को समझाकर जाम को खुलवाने में लग गया।
नेत्रहीन पिता और बूढ़ी मां का छिना सहारा
रोजा। वेदपाल की लाश मिलने के बाद उसके नेत्रहीन पिता तन्नेलाल व मां सुदामा के बुढ़ापे का सहारा ही छिन गया। चार भाइयों व तीन बहनों में सबसे छोटा वेदपाल ही माता-पिता की देखभाल करता था। तन्नेलाल के चार बेटों में सर्वेश, नरेश, रामपाल और बेटियों में कमला, विमला, उर्मिला की शादी हो चुकी है। बेटियां ब्याह कर अपने-अपने घर की हो गईं, तीनों बेटे शादी के बाद अपना-अपना परिवार लेकर पड़ोस में ही अलग-अलग झोपड़ी डालकर रहने लगे। वेदपाल सबसे छोटा था। इसलिए वहीं नेत्रहीन पिता और बूढ़ी मां का सहारा बना था। दोनों में से कोई भी जरा सा भी बीमार पड़ जाता तो वह ही उन लोगों के लिए दवा लेकर आता था। रात में कभी किसी भी तरह की दिक्कत माता-पिता को होती तो वही रात में उठकर उनकी देखभाल करता था। वेदपाल की मौत के बाद वैसे तोे हर किसी की आंखें नम थीं, लेकिन उसके माता-पिता के आंसू थम नहीं रहे थे।