22 अगस्त 2011 की शाम चार बजे पुनीत अपने परिवारवालों के साथ बंडा में वंदना के किराए वाले कमरे पर पहुंचा और शशि वाजपेयी यह कहते हुए कमरे से बाहर निकाल दिया कि दहेज की मांग पूरी न किए जाने का मजा आज चखाया जाएगा। शशि नीचे के माले पर आकर मकान मालिक के घर काफी देर तक बैठी रही और शाम सात बजे ऊपर बेटी के कमरे पर गई तो देखा कि पुनीत एक शीशी में रखा तरल पदार्थ जबरन वंदना को पिलाने में जुटा है जबकि अन्य मौजूद ससुराल वाले उसका मुंह जबरन खुलवाने में जुटे थे। शीशी का द्रव घोंटते ही वंदना ने उल्टियां करनी शुरू कीं तो ससुराल वाले वहां से निकल भागे। शशि अपनी बेटी को लेकर तुरंत बंडा सरकारी अस्पताल पहुंची जहां से जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां पहुंचने पर डाक्टरों से उसे मृत घोषित कर दिया। सरकारी वकील मनफूल सिंह वर्मा की ओर से प्रस्तुत गवाहों के बयान और पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं अभियुक्तों का पक्ष सुनने के बाद बृहस्पतिवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।