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स्वास्थ्य निदेशक ने साढ़े नौ घंटे की पूछताछ

Wed, 26 Aug 2015 12:13 AM IST
शाहजहांपुर
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बीते शनिवार को प्रसव के दौरान जिला महिला अस्पताल में गला काटे जाने से नवजात की मौत और बाद में हुई प्रसूता की मौत के प्रकरण पर प्रदेश सरकार ने गंभीर संज्ञान लिया है। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) ने अस्पताल के प्रमुख चिकित्साधीक्षक डॉ. अश्विनी कुमार और प्रसव के दौरान ड्यूटी पर तैनात रहीं डॉ. ज्योति मेहरोत्रा को निलंबित कर दिया। इस संबंध में उनकी ओर से जारी आदेश की प्रति फैक्स से मंगलवार को डीएम कार्यालय में पहुंची। इस बीच प्रकरण के संबंध में सरकार की ओर से स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. आशा पांडेय मंगलवार को जिला महिला अस्पताल पहुंचीं और करीब साढ़े नौ घंटे तक अस्पताल के स्टाफ से प्रकरण के संबंध में अलग-अलग पूछताछ की। उन्होंने सीएमएस समेत दोनों आरोपी चिकित्सकों से भी पूछताछ की। वह अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को सौंपेंगी।
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सुबह साढ़े आठ बजे से सायं करीब छह बजे तक पूछताछ का दौर चला। डॉ. पांडेय ने मृत प्रसूता गीता के पति हेमंत और उसके परिवार के अन्य सदस्यों से भी एकांत में पूछताछ की। अपने बयान में हेमंत ने महिला अस्पताल के स्टाफ द्वारा पत्नी गीता के प्रसव के दौरान पैसे मांगे जाने का आरोप लगाया। कहा कि मांग के मुताबिक पैसे न दिए जाने पर प्रसव के दौरान स्टाफ ने ठीक से प्रसूता और नवजात की केयर नहीं की, जिसके चलते दोनों की मौत हो गई। बाद में मीडिया से बातचीत में डा. पांडेय ने कहा कि वह अपनी जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को सौंपेंगी। यहां जांच के दौरान मिले तथ्यों के बारे में टिप्पणी करने से इंकार किया। उन्होंने बस इतना ही कहा कि प्रसव के दौरान कई बार जच्चा-बच्चा को बचाने के लिए चिकित्सकीय तौर पर अंग-भंग करना जरूरी हो जाता है। इस मामले में चिकित्सक के स्तर पर बरती गई लापरवाही के सवाल पर वह चुप रहीं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि महिला अस्पताल में प्रमुख चिकित्साधीक्षक पद पर महिला चिकित्सक को ही तैनात किया जाना चाहिए।
बता दें कि बीते शनिवार को दिलाजाक इलाके की गीता को प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल में भरती कराया गया था। नार्मल डिलीवरी के दौरान नवजात का सिर बच्चेदानी में फंस गया था और धड़ बाहर निकल आया था। तब आनन-फानन में चिकित्सक ने नवजात का गला काटकर धड़ को अलग बाहर निकाल लिया था। बच्चे के मौत गई थी और प्रसूता की गंभीर हालत को देखते हुए निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया था, जहां रविवार की सुबह उसने भी दम तोड़ दिया।
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डीएम शुभ्रा सक्सेना ने प्रकरण पर गंभीर संज्ञान लेते हुए सीएमएस और डॉ. ज्योति के निलंबन की संस्तुति सोमवार को शासन को भेज दी थी। सोमवार को ही बरेली मंडल की अपर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अनीता दत्ता जिला अस्पताल पहुंचीं और प्रकरण के संबंध में जांच की थी।


एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने शुरू की जांच
शाहजहांपुर। प्रसूता और नवजात की मौत के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। इस केस में डॉ. अश्विनी कुमार और सर्जन डॉ. ज्योति मेहरोत्रा नामजद आरोपी हैं। साथ ही इस प्रसव के दौरान जिला महिला अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात रहे अन्य स्टाफ का भी ब्योरा पुलिस ने अस्पताल प्रशासन से तलब किया है ताकि उन्हें भी प्रकरण में नामजद किया जा सके। पुलिस ने प्रसूता के पति हेमंत की ओर से दी गई तहरीर को एफआईआर का आधार बनाकर प्रकरण की जांच शुरू की है। एसपी बबलू कुमार के अनुसार, विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार संपूर्ण विधिक कार्रवाई होगी। कोतवाल केके तिवारी ने बताया कि जल्द ही पीड़ित परिवार के लोगों के बयान लिए जाएंगे।
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