हरजीत सिंह एनकाउंटर मामले में मृतक के पिता की 20 लाख रुपये मुआवजा की मांग पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश और पंजाब सरकार से जवाब मांगा है। लुधियाना निवासी हरजीत सिंह का पुवायां पुलिस ने आतंकवादी बताकर एनकाउंटर किया था। सीबीआई की जांच में एनकाउंटर फर्जी साबित होने पर सीबीआई कोर्ट ने पुवायां के तत्कालीन इंस्पेक्टर आरके सिंह (सजा के समय सीतापुर के सीओ सिटी), पटियाला के तत्कालीन डीएसपी हरिंदर सिंह सहित चार आरोपियों को अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। घटनाक्रम के मुताबिक 12 अक्तूबर, 1993 की रात पुवायां के तत्कालीन इंस्पेक्टर आरके सिंह ने गांव बिलसड़ी बुजुर्ग के पास पंजाब के लुधियाना के थाना पापल के गांव सहास मदारा निवासी हरजीत सिंह को एक लाख का इनामी आतंकी बताते हुए मार गिराया था। एनकाउंटर के बाद शव के पास से 38 बोर का रिवाल्वर, 39 कारतूस और 11 खोखों की बरामदगी दर्शाई गई थी। आरके सिंह को हरजीत सिंह के एनकाउंटर के बाद प्रमोशन दिया गया था। उन्हें राष्ट्रपति पदक से भी नवाजा गया था। पुवायां के मोहल्ला कसभरा तकिया निवासी वकील विजय वर्मा ने पुवायां थाने के पास जीडी के फटे पन्ने पड़े देख हरजीत सिंह के एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए मुख्यमंत्री सहित तमाम अधिकारियों से शिकायत की थी। वर्ष 1996 में उनकी ओर से आरके सिंह के खिलाफ अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके बाद हरजीत सिंह के परिवार के लोगों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। 1998 में सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच की थी। जांच में हरजीत सिंह का एनकाउंटर फर्जी साबित हुआ और हत्या आदि धाराओं में पटियाला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। 28 नवंबर, 2014 को आरके सिंह को हिरासत में ले लिया गया था। 30 नवंबर 2014 को उनके सहित चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। आरोपी पंजाब की जेल में सजा काट रहे हैं। हरजीत सिंह के पिता मोहिंदर सिंह ने वर्ष 2015 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि उनके पुत्र हरजीत को पंजाब और यूपी पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर में मार दिया था, जिसमें दोषियों का सजा भी हुई है। अब वह वृद्ध और काम करने में लाचार हैं। उनको गुजर बसर के लिए पंजाब और यूपी सरकार से 20 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में पंजाब और यूपी सरकार को दस-दस लाख रुपये देने अथवा रुपये क्यों न दिए जाएं इस पर जवाब दाखिल करने को कहा है। मुकदमे की अगली सुनवाई 18 जनवरी 2017 को होनी है। हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए यूपी के प्रमुख सचिव ने शाहजहांपुर के एसपी से जानकारी मांगी तो एसपी ने पुवायां पुलिस से जानकारी तलब की। पुवायां में रिकार्ड उपलब्ध नहीं होने पर एसआई प्रमोद कुमार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट गए और वहां से जानकारी जुटा कर वापस लौटे। पुवायां के कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।
अमरजीत अपहरण, हत्याकांड में हरजीत को फंसाने की थी योजना
पटियाला पुलिस की मिलीभगत से पुवायां पुलिस की योजना हरजीत सिंह को पुवायां के गांव पहाड़पुर से हुए अमरजीत सिंह के अपहरण और हत्या में फंसाने की थी लेकिन पुलिस के सारे दांव उलटे पड़ गए और अंतत: फर्जी एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा हो गई। 1993 के अक्तूबर माह की शुरूआत में पुवायां के गांव पहाड़पुर निवासी करनैल सिंह के 16 वर्षीय पुत्र अमरजीत सिंह का उसके झाले से आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था। आतंकवादियों ने करनैल से पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। इसी दौरान पटियाला पुलिस के माध्यम से हरजीत सिंह को पुवायां पुलिस यहां ले आई थी। अमरजीत सिंह के भाई चरनजीत सिंह ने बताया कि वह लोग आतंकवादियों के बताए अनुसार गांव सिसोरा से आगे मंदिर के पास फिरौती की रकम लेकर पहुंचे। एक युवक बाइक से फिरौती लेने आया तो वहां छिपी पुवायां पुलिस बाहर निकल पड़ी, लेकिन युवक को पकड़ने का प्रयास नहीं किया। इस पर फिरौती लेने आया युवक भाग निकला और थोड़ी ही दूर खेत में अमरजीत की गोली मारकर हत्या कर दी। पुवायां पुलिस ने हरजीत सिंह को आतंकवादी साबित करने के लिए अमरजीत सिंह के अपहरण और हत्या में फंसाने की साजिश रच डाली। पुलिस ने गांव बिलसड़ी बुजुर्ग के पास 12 अक्तूबर, 1993 की रात हरजीत सिंह को मार गिराया। इसके बाद पुलिस अमरजीत सिंह के पिता करनैल सिंह को मौके पर ले गई और पुत्र के अपहरणकर्ता के रूप में हरजीत की पहचान करने को कहा, लेकिन करनैल सिंह ने इससे इंकार कर दिया। इसके बाद हरजीत के परिवार वालों की गुहार पर पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की मदद से मामले की जांच सीबीआई को दी गई। सीबीआई ने गांव आकर करनैल सिंह से पूछताछ की और इसके बाद उनकी कोर्ट में गवाही भी हुई।