जयराखन पौत्री की शादी की व्यवस्थाओं को लेकर काफी चिंतित थे। रुपये के इंतजाम को लेकर वह पुत्र के साथ खुद भी भागदौड़ कर रहे थे। जैसे-जैसे बारात आने का तारीख नजदीक आती जा रही थी, उनकी परेशानी बढ़ती जा रही थी।
शुक्रवार को पिता-पुत्र के बीच शादी की तैयारियों को लेकर बातचीत हुई थी। गेहूं कम निकलने पर जयराखन बेहद परेशान थे। पुत्र शंकरलाल के अनुसार गेहूं की फसल बढ़िया थी और दो एकड़ में 40 से 50 क्विंटल गेहूं होने की संभावना थी। इससे घर के खर्च के अलावा शादी में अच्छी मदद मिलती, लेकिन मात्र 15 क्विंटल गेहूं निकलने से पिता को गहरा सदमा पहुंचा था। शंकरलाल ने पिता को चिंता नहीं करने की बात कहते हुए ढांढस भी बंधाया था, लेकिन पिता हिम्मत हार बैठे थे। शनिवार सुबह पिता ने कहा कि वह जमीन के ठेके के रुपये लेने जा रहे हैं। रुपये मिलने के बाद शादी के लिए सामान खरीदा जाना था। उसे जरा भी आभास नहीं था कि पिता आत्महत्या के इरादे से नहर में कूद जाएंगे।
गांव मुड़िया छावन के लोग भी जयराखन के नहर में कूद जाने की घटना से सकते में हैं। गांव के लोगों के अनुसार जयराखन सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित थे, लेकिन वह काफी जीवट वाले व्यक्ति थे। गांव में उनकी कई लोगों से बैठक थी। लोगों का कहना है कि फसल खराब होने से वह परेशान थे, लेकिन उनकी बातों से कभी ऐसा नहीं लगा कि वह आत्महत्या करने जैसा कदम भी उठा सकते हैं।